एचआईवी पीड़ित छात्र को स्कूल में दाखिला लेने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। छात्र के ताऊ ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर स्कूल में दाखिले के लिए गुहार लगाई है।
वहीं, जिला उपायुक्त ने परिजनों पर मामले को तूल देने का आरोप लगाया है। उपायुक्त का कहना है कि स्कूल प्रशासन बच्चे को दाखिला देने को तैयार है।
पीड़ित ने छात्र ने एक हाई स्कूल में वर्ष 2013- 2014 में चौथी कक्षा तक पढ़ाई की। नए सत्र में प्रवेश के समय जब स्कूल प्रशासन को यह पता चला की छात्र एचआईवी संक्रमित है तो उसे स्कूल से निकाल दिया गया।
छात्र के दाखिले के लिए उसके परिजनों ने स्कूल प्रशासन से काफी मिन्नतें कीं, लेकिन छात्र को दाखिला नहीं दिया गया। पीड़ित छात्र के दाखिले के लिए उसके ताऊ ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर गुहार लगाई है।
माता-पिता की हो चुकी है मौत
पीड़ित छात्र के माता-पिता एचआईवी संक्रमित थे। कुछ साल पहले दोनों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद से छात्र अपने ताऊ के पास रह रहा है। ताऊ ही एचआईवी संक्रमित छात्र का पालन-पोषण कर रहे हैं।
कहीं और बच्चे न हो जाएं संक्रमित
पीड़ित छात्र के ताऊ ने आरोप लगाते हुए बताया कि जब बच्चे के दाखिले के लिए स्कूल प्रशासन से बात की गई तो स्कूल प्रशासन ने उनसे कहा कि आपका बच्चा एचआईवी संक्रमित है।
यह बच्चा अगर लड़ाई-झगड़े के दौरान किसी अन्य बच्चे को काट लेगा तो उसे भी संक्रमण हो सकता है। इस लिए हम आपके बच्चे को स्कूल में दाखिला नहीं दे सकते हैं।
परिजन बेवजह तूल दे रहे
जब इस बारे में उपायुक्त राजीव रत्न से बात की गई तो उन्होंने कहा कि परिजन बेवजह मुद्दा बना रहे हैं। स्कूल प्रशासन बच्चे को दाखिला देने को तैयार है। अगर परिजनों को इस मसले में कोई प्रशासनिक जरूरत है तो उनसे मिल सकते हैं।