प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और अधिकारियों की प्रमोशन और वेतन विसंगतियों के मामले विवि की वित्त कमेटी में जाएंगे। अब सीधे ईसी में इन पर फैसला नहीं होगा। शनिवार को कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी की अध्यक्षता में हुई एचपीयू की कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में यह फैसला लिया गया।
बैठक में कर्मचारियों का कोई नुमाइंदा नहीं था लेकिन ईसी ने कर्मचारी वर्ग से जुड़े सभी मामलों को पहले वित्त कमेटी में ले जाने का फैसला लिया है। इससे साफ है कि अब ईसी वित्त से जुड़े मामलों पर सीधे फैसला नहीं ले सकेगी। बैठक में ईसी ने 14 अगस्त को हुई वित्त समिति की बैठक की सिफारिशों को भी मंजूरी दी।
विवि के वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2012-2013 को विवि कोर्ट की अगली बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। ईसी ने फैसला लिया कि सभी अकादमिक मामलों को अब सीधे ईसी में नहीं लाया जाएगा। मामलों पहले काउंसिल में जाएंगे। वहां से मंजूर होने के बाद ही इन्हें अंतिम फैसले के लिए ईसी में लाया जाएगा।
बैठक में बनाए गए नए सदस्य
विवि की कार्यकारी परिषद के कमेटी रूम में शनिवार को हुई बैठक में कुलपति ने कार्यकारी परिषद सदस्य रहे कर्मचारी नेता चौधरी वरयाम सिंह बैंस, प्रो. डीसी गौतम और डॉ. एससी शर्मा प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय, ढलियारा का ईसी में सदस्य रहते हुए किए कार्यों पर आभार जताया।
उन्होंने ईसी के लिए इन सदस्यों के स्थान पर प्राचार्य कोटे से नए सदस्य बने प्रो. पीएन बंसल, अधिष्ठाता दर्शन और दृष्य कलाएं, डा. कृष्ण वैद्य को सदस्य बनाया गया। कुलपति ने इस अवधि के दौरान विवि में आयोजित कार्यक्रमों, बैठकों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और विभिन्न गतिविधियों के संबंध में जानकारी दी।
बैठक में यह सदस्य रहे मौजूद
विवि कार्यकारी परिषद की इस बैठक में प्रति कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान, सीपीएस इंद्र दत्त लखनपाल, विधायक बंबर ठाकुर, कुलसचिव प्रो. मोहन झारटा, पर्यटन विकास निगम के के उपाध्यक्ष हरीश जनारथा, चंद्रशेखर, अतिरिक्त मुख्य सचिव (शिक्षा) पीसी धीमान, प्रधान सचिव (वित्त) डा. श्रीकांत बाल्दी, प्रो.पीएन बंसल, डॉ. एसएस कौशल और डा. अनुराग शर्मा मौजूद रहे।
मार्क्सशीट मामले पर विवि ने रखी रिपोर्ट
विवि में उजागर हुए फर्जी मार्क्सशीट मामले पर विवि ने रिपोर्ट बैठक में रखी। इसमें बताया गया है कि कुलपति की विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आरोपी डीआर स्तर के अधिकारी को निलंबित किया गया। कुलपति ने इस मामले की जांच के लिए अलग से फेक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित कर 15 दिन में रिपोर्ट पेश करने का समय दिया है।
इस मामले पर सदस्यों ने चरचा की और इस मामले में आगामी कार्रवाई को लेकर अवगत करवाया। कुलसचिव पर लगे आरोपों के मामले पर भी चरचा हुई है। बैठक में फीस बढ़ोतरी मामले पर कोई चरचा नहीं हुई।