लखनऊ विश्वविद्यालय में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया फिर लटक गई है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि विश्वविद्यालय 167 पदों पर नियुक्ति के लिए जारी किए गए विज्ञापन पर नियुक्ति नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लविवि के विज्ञापन पर रोक लगाते हुए नया विज्ञापन जारी कर नियुक्तियां करने को कहा है। इसके साथ ही लविवि को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय भी दिया गया है।
नैक के निरीक्षण को देखते हुए लविवि ने अपने खाली पदों पर नियुक्तियां शुरू करने के लिए विज्ञापन जारी किया था। यूनिवर्सिटी ने जनवरी में शिक्षकों के 167 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया था।
लेकिन आरक्षण के रोस्टर को लेकर कई अभ्यर्थी कोर्ट चले गए थे। इस मामले में शिक्षक संघ का भी कहना था कि नियुक्तियों में रोस्टर के नियमों का पालन नहीं किया गया है।
इसके बाद राजीव कुमार ने हाईकोर्ट में नियुक्तियों के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग को भी पक्षकार बनाया था।
उनका कहना था कि विश्वविद्यालय ने अलग-अलग पदों को एक साथ जोड़कर विज्ञापन दे दिया है जो सही नहीं है।
जस्टिस सत्येंद्र सिंह चौहान और जस्टिस राकेश श्रीवास्तव की बेंच ने याची के तर्क को सही करार देते हुए विश्वविद्यालय के विज्ञापन को गलत करार दिया और नए विज्ञापन पर भर्ती करने का निर्देश दिया।