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LU: सवालों के घेरे में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया

Tue, 25 Feb 2014 08:51 AM IST
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ विश्वविद्यालय में दो फेज में की गई पीएचडी की प्रवेश प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। हाईकोर्ट ने लखनऊ विश्वविद्यालय और यूजीसी को नोटिस जारी कर इस मामले पर जवाब तलब किया है।
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न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति महेन्द्र दयाल ने दो अधिवक्ताओं अमरजीत सिंह बिसेन और अमित अवस्थी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया है।

इन अधिवक्ताओं ने एलयू की दो फेज में हुई पीएचडी प्रवेश परीक्षा पर सवाल उठाया है कि जेआरएफ पास अभ्यर्थियों को सीधे मेरिट से दाखिला देकर एलयू खुद अपने पीएचडी आर्डिनेंस और यूजीसी के रेग्युलेशन का उल्लंघन कर रहा है।
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जबकि नियमानुसार पीएचडी की खाली सीटों पर जेआरएफ व नॉन जेआरएफ स्टूडेंट्स को एक साथ प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दाखिला देना चाहिए।

यही नहीं प्रवेश परीक्षा पास अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के बाद दाखिला देने का प्रावधान है, जिसे एलयू नहीं मान रहा। फिलहाल अब इस प्रकरण में एलयू व यूजीसी की ओर से नोटिस का जवाब आने के बाद अप्रैल में मामले पर अंतिम फैसला किया जाएगा।

याचिकाकर्ता अमरजीत सिंह बिसेन और अमित अवस्थी के अनुसार जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) के लिए सामान्य वर्ग के वही अभ्यर्थी पात्र होते हैं जिनकी आयु सीमा 28 वर्ष हो।

वहीं एससी-एसटी, ओबीसी, विकलांग और महिला को पांच साल और एलएलएम पास को आयु में तीन साल की छूट दी गई है। जबकि पीएचडी में दाखिले के लिए कोई उम्र सीमा तय नहीं है।

एलयू प्रशासन पीएचडी की खाली सीटों पर पहले जेआरएफ पास अभ्यर्थियों को सीधे मेरिट से दाखिला देता है। अगर जेआरएफ पास अभ्यर्थियों की संख्या बहुत अधिक है तो उन्हीं के बीच में प्रवेश परीक्षा करवाकर सीटें भर लेता है।

यानि पीएचडी प्रवेश परीक्षा में जेआरएफ पास अभ्यर्थियों को वह प्राथमिकता देता है। याचिकाकर्ता अमरजीत सिंह बिसेन कहते हैं कि जब पीएचडी में दाखिले के लिए आयु सीमा निर्धारित नहीं है।

तो फिर एलयू जेआरएफ पास अभ्यर्थियों को सीधे मेरिट से दाखिला देकर इसे एक निश्चित आयु सीमा में बांध रहा है, जो कि नियमानुसार गलत है।

वे कहते हैं कि एलयू के पीएचडी आर्डिनेंस में प्वाइंट 3.2 में लिखा है कि फेज वन में सीएसआईआर व यूजीसी जेआरएफ पाने वाले अभ्यर्थियों को सीधे दाखिला दिया जाएगा।

इसके अलावा 3.3 में लिखा है कि अगर सीटों के मुकाबले जेआरएफ पास अभ्यर्थी अधिक हैं तो इन्हीं जेआरएफ पास अभ्यर्थियों के बीच पीएचडी में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा होगी।

वहीं दूसरी ओर  प्वाइंट 4.2 में पीएचडी की एलिजिबिलिटी 55 प्रतिशत अंकों के साथ पोस्टग्रेजुएट होना लिखा गया है। ऐसे में विश्वविद्यालय खुद ही अपने नियम का उल्लंघन कर रहा है।

वहीं यूजीसी रेग्युलेशन 2009 के अनुसार पीएचडी में दाखिले के लिए सभी पात्र अभ्यर्थियों को प्रवेश परीक्षा और उसके बाद साक्षात्कार के माध्यम से दाखिला दिए जाने का प्रावधान है।

याचिकाकर्ता अमरजीत सिंह बिसेन और अमित अवस्थी कहते हैं कि जेआरएफ पास अभ्यर्थियों को सीधे मेरिट से दाखिला देने और फर्स्ट फेज में सिर्फ उन्हें की योग्य माने जाने से 100 प्रतिशत का अधिभार उन्हें मिल रहा है।

यही नहीं सामान्य वर्ग के 28 वर्ष से ऊपर की आयु सीमा वाले अभ्यर्थी जो कि जेआरएफ का लाभ पाने के पात्र नहीं हैं वह फर्स्ट फेज से बाहर हो रहे हैं। ऐसे में एलयू की यह प्रवेश प्रक्रिया नियम संगत नहीं है।

याचिकाकर्ता अमरजीत सिंह बिसेन का कहना है कि दो फेज में पीएचडी की प्रवेश प्रक्रिया करवाकर एलयू संविधान की धारा की धारा 14 जिसमें समानता का अधिकार, यूजीसी रेग्युलेशन 2009 और लखनऊ विश्वविद्यालय के पीएचडी आर्डिनेंस 2011 के सेक्शन चार का उल्लंघन कर रहा है।

याचिकाकर्ता का दावा है कि उनका पक्ष मजबूत है और उन्हें आगे इस मामले में न्याय मिलेगा। फिलहाल अब इस मामले में अप्रैल 2014 में अंतिम फैसला होगा।

क्या कहता है एलयू प्रशासन
इस बारे में एलयू के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय कहते हैं कि हाईकोर्ट की ओर से जो भी नोटिस मिला है, अभी उसकी जानकारी ली जाएगी। हम माननीय न्यायालय के सभी आदेशों का पालन करेंगे।

यूनिवर्सिटी नोटिस का जवाब देगी और अपने पक्ष को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करेगी। आगे जो कुछ निर्णय होगा उसका पालन किया जाएगा, क्योंकि मामला कोर्ट में है इसलिए अभी इस पर कोई भी टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा।
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