2013 में एलाइड एंड एग्जीक्यूटिव पीसीएस अधिकारियों की भर्ती के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। भर्ती के लिए मुख्य परीक्षा के दौरान जनरल स्टडीज़ विषय के चार भागों में हरेक भाग के न्यूनतम अंक हासिल करने के सरकारी फार्मूले पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपनी मुहर लगा दी है।
एकल बेंच ने फार्मूले को गलत ठहराते हुए चारों भागों के अधिकतम अंकों के जोड़ में से न्यूनतम अंक आंकने का आदेश दिया था। एकल बेंच ने सभी भागों के अधिकतम अंकों में से ही न्यूनतम अंक के आधार पर नए सिरे से मेरिट तैयार करने का आदेश दिया था। इस फैसले को कुछ उम्मीदवारों ने अपील के माध्यम से चुनौती दी थी।
डिवीजन बेंच ने सरकार के फार्मूले को सही करार दिया है। अपील पर नोटिस जारी किया गया था और परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन अब एकल बेंच का फैसला रद्द करने के साथ ही यह रोक भी हट गई है।
डिवीजन बेंच के फैसले के साथ ही अब पुरानी मेरिट के हिसाब से परिणाम घोषित करने का रास्ता साफ हो गया है। पीसीएस मुख्य परीक्षा में पंजाबी और अंग्रेजी भाषा के पेपर 100-100 अंक के थे, निबंध 150 अंकों का था। जनरल स्टडीज का पेपर 1000 अंकों का था और इस विषय को चार भागों में बांट कर हरेक भाग में से न्यूनतम 33 अंक हासिल करने की प्रक्रिया तय की गई थी।
इसी को चुनौती दी गई थी कि जब अन्य विषयों के कुल अंकों में से न्यूनतम अंकों का मापदंड तय किया गया है तो जनरल स्टडीज विषय के भी कुल 1000 अंकों में से न्यूनतम अंक यानि 330 अंकों का मापदंड होना चाहिए। एकल बेंच ने सरकार की इस प्रक्रिया को खारिज कर दिया था और अब डिवीजन बेंच ने सरकारी फार्मूले को सही करार दिया है।