लखनऊ यूनिवर्सिटी के एमबीए विभाग के रीडर डॉ. नीरज कुमार को प्रोफेसर केपद पर प्रमोशन के मामले में हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है।
अदालत ने मामले को अनुशासनात्मक समिति के सुपुर्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि उनके प्रमोशन मामले पर यूनिवर्सिटी की कार्य परिषद जांच रिपोर्ट के परिणाम के साथ फिर से गौर करेगी।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह व न्यायमूर्ति महेंद्र दयाल की खंडपीठ ने उनके रिट को गुण-दोष (मेरिट) विहीन करार देते हुए खारिज कर दिया।
याची ने कुलाधिपति के 3 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें यूनिवर्सिटी कार्य परिषद को उनके प्रोफेसर पद पर किए गए प्रमोशन पर फिर से गौर करने के निर्देश दिए गए थे।
साथ ही इस आदेश में कुलपति को निर्देश दिया गया था कि एक अनुशासनात्क समिति बनाकर कार्यपरिषद की सिफारिश पर तीन माह में निर्णय लिया जाए।
इस मामले में याची के खिलाफ आरोप था कि उन्होंने प्रमोशन पाने के लिए जो किताबें व शोधपत्र प्रस्तुत किए, उनमें एक किताब से कंटेंट चोरी कर शामिल किए गए थे। इसी को लेकर उनके प्रमोशन पर विवाद सामने आया।