प्रदेश के निजी नर्सिंग कॉलेजों में सरकारी कोटे की सीटें सिर्फ कहने के लिए ही सरकारी हैं, इन पर दाखिला लेने वाले छात्रों से सरकारी कॉलेजों के मुकाबले पांच से सात गुना तक फीस वसूली जाती है।
यही वजह है कि एएनएम की काउंसिलिंग में 113 सरकारी कोटे की सीटों में से 111 खाली रह गईं। अब ये सभी सीटें कॉलेजों को दी जाएंगी, जो मैनेजमेंट कोटे के तहत इन पर दाखिले देंगे।
दो चरण की काउंसिलिंग पूरी
प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग और एमएससी नर्सिंग की सरकारी कॉलेजों और निजी कॉलेजों की सरकारी कोटे की सीटों के लिए दो चरण की काउंसिलिंग पूरी हो चुकी है।
बृहस्पतिवार से वेटिंग लिस्ट से तीसरे चरण की काउंसिलिंग शुरू हुई। एएनएम की 113 सीटों (2 सरकारी, 111 निजी) के लिए 250 वेटिंग वाले अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। लेकिन दिनभर चली काउंसिलिंग के बाद सिर्फ सरकारी कॉलेजों की ही दोनों सीटें भर सकीं। निजी कॉलेजों की सरकारी कोटे की 111 सीटें खाली रह गई।
काउंसिलिंग बोर्ड के सदस्य डा. बीएस रावत ने बताया कि अब यह सभी सीटें निजी कॉलेजों को वापस कर दी गई हैं। इन सीटों पर अब कालेज मैनेजमेंट कोटे के तहत 31 अक्तूबर तक एडमिशन ले सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि छात्रों के कम रुझान की मुख्य वजह सरकारी कॉलेजों की तुलना में निजी कॉलेजों की भारी फीस है। सरकारी कॉलेजों में जो कोर्स 20 हजार रुपये सालाना में हो जाता है, वह निजी कॉलेजों में एक से डेढ़ लाख के बीच होता है।
इन सीटों पर मौका बाकी
प्रदेश में अब नर्सिंग कोर्स की सीटें सिर्फ निजी कॉलेजों में खाली रह गई हैं। जीएनएम की 127 (दो सरकारी पुरुष वर्ग) सीटों के लिए शुक्रवार को काउंसिलिंग होगी। शनिवार को बीएससी नर्सिंग की 99, पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग की 16 और एमएससी नर्सिंग की नौ सीटों के लिए काउंसिलिंग होगी। ये सभी सीटें निजी कॉलेजों की हैं। इसके बाद खाली रहने वाली सरकारी कॉलेजों की सीटों के लिए अंतिम काउंसिलिंग 30 और 31 अक्तूबर को होगी।