अब तक आपने क्लास रूम में किताबों से पढ़ाई होती देखी है, लेकिन जामिया मिल्लिया इस्लामिया में नए सत्र से कक्षाओं में शेरो-शायरी और गजल का दौर चलेगा।
देश में पहली बार सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स का मसौदा तैयार किया है, जिसमें बिना स्कूल गए छात्र भी दाखिला ले सकेंगे। हालांकि दाखिले के लिए एंट्रेस्ट टेस्ट समेत इंटरव्यू पास करना होगा।
कुलपति प्रोफेसर एसएम साजिद के अनुसार, मुगलकालीन रियासत और मिर्जा गालिब की दिल्ली में वर्षों बाद शेरो-शायरी, गजलों और ठुमरी की महफिल सजेगी। उर्दू विभाग में कक्षाएं होंगी।
शैक्षणिक सत्र 2014-15 में उर्दू सर्टिफिकेट और एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स शुरू होगा, जिसकी लगभग 30-30 सीटें हो सकती हैं। सर्टिफिकेट कोर्स में वे लोग भी दाखिला ले सकेंगे, जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा।
एक साल में दो सेमेस्टर होंगे, जिसमें 100 नंबर की दो परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। कैंपस में कक्षा वीकेंड पर शाम को चलेंगी, जिसमें दो पीरियड होंगे।
भारत-पाक शायरों की नज्में शामिल
पाठ्यक्रम में मिर्जा गालिब, मीर तकी मीर, जिगर मुरादाबादी, दाग देहलवी, नासिर काजमी आदि की नज़्मों को शामिल किया गया है।
पाठ्यक्रम को तैयार करते समय ख्याल रखा गया है कि नज़्म व शेरो-शायरी को बोलकर नहीं, बल्कि गाकर पढ़ाया जाए। इसके लिए देशभर से विशेष उर्दू गायक शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे। यही नहीं, छात्रों को लता, सुरैया, जगजीत, गुलाम अली, मेहंदी हसन आदि की गजलों को भी गाने का मौका मिलेगा।