उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों की हालत पूरे देश में बदहाली की मिसाल दे रही है। सरकारी स्कूलों की दुर्दशा जानने के लिए किसी दुर्गम इलाके में जाने की जरूरत नहीं है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के आवास से महज तीन किलोमीटर दूर स्थित दो स्कूलों की हालत पूरी कहानी बया कर देती है।
शिक्षकों की कमी के कारण प्रदेश के कई स्कूलों पर ताला लग चुका है, लेकिन यहां एक स्कूल में 16 बच्चों के लिए तीन शिक्षक तैनात हैं। दूसरा सरकारी स्कूलों की बदहाली की मिसाल है। यहां बच्चे खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ते हैं।
बुधवार दोपहर अमर उजाला टीम प्राथमिक विद्यालय गल्जवाडी पहुंची तो वहां आठ बच्चों को एक महिला पढ़ा रही थी। हमने इसे शिक्षिका समझा, लेकिन पूछा तो पता चला कि वह स्कूल में तैनात शिक्षक की पत्नी है।
बातों बातों में पता चला कि स्कूल में तैनात दो शिक्षक शिव कुमार तोमर और खेमकरण क्षेत्री कार्यालय के काम से कहीं गए हुए थे, जबकि तीसरी शिक्षिका लता असवाल का अता पता नहीं था। कुछ देर बाद लता लौटीं तो अमर उजाला टीम को देखकर हड़बड़ा गईं। उन्होंने बताया कि स्कूल में 16 बच्चे हैं, लेकिन आज आठ ही स्कूल पहुंचे।
इसके बाद हम पहुंचे पास ही स्थित प्राथमिक विद्यालय इंदिरा नगर। इस स्कूल के लिए नया भवन करीब तीन साल पहले स्वीकृत हुआ था। काम भी शुरू हुआ, लेकिन बजट की कमी आड़े आ गई। जबकि, पुराना भवन पहले ही तोड़ा जा चुका है।
ऐसे में बच्चे खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ते हैं। मौसम खराब होने पर बच्चों को संकुल केंद्र के एक कमरे में बैठा दिया जाता है। इस स्कूल में 28 बच्चों पर दो शिक्षक तैनात हैं।
छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, प्रदेश के ऐसे समस्त स्कूलों से जहां बच्चे कम और शिक्षक अधिक हैं आगामी शिक्षा सत्र से उन शिक्षकों को हटाकर उन्हें दूसरे विद्यालयों में भेजा जाएगा।
- सीमा जौनसारी, शिक्षा निदेशक