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जांच टीम को नहीं दिखाई दी रैगिंग, स्कूल को क्लीन चिट

Wed, 09 Oct 2013 02:43 AM IST
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
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लखनऊ। डॉ. एमसी सक्सेना ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में बीफॉर्मा फर्स्ट सेमेस्टर की छात्रा सुंबुल की मौत रैगिंग के कारण नहीं हुई थी।
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जीबीटीयू द्वारा गठित जांच कमेटी के चेयरमैन प्रो. जगवीर सिंह का कहना है कि कॉलेज में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, छात्रों, शिक्षकों व घरवालों की गवाही के आधार पर इस नतीजे पर पहुंचे कि यह रैगिंग का मामला नहीं था।

उनका कहना है कि घर से सुंबुल जब बस पर बैठी थी तभी से वह रो रही थी। कॉलेज में आते ही सीधे वह क्लास में जाने की बजाय छत पर पहुंच गई।

थोड़ी देर बाद पता चला कि उसने छत से छलांग लगा दी है। जीबीटीयू के कुलपति डॉ. आरके खांडल और जांच कमेटी के चेयरमैन प्रो. जगवीर सिंह ने मंगलवार को इस मामले की 45 पन्नों की रिपोर्ट पेश की।
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कुलपति का कहना है कि रैगिंग के कोई भी सबूत नहीं मिले हैं। एंटी रैगिंग सेल के प्रभारी व जांच कमेटी के चेरयमैन प्रो. जगवीर सिंह के मुताबिक रैगिंग में किसी सीनियर छात्र का नाम नहीं आया।

घरवाले यह भी नहीं बता सके कि उन्होंने कॉलेज के किस अधिकारी को रैगिंग की जानकारी दी थी। इस संबंध में वे कोई पुख्ता जानकारी नहीं दे सके। अंग्रेजी में कमजोर होने पर ताना देने का आरोप जिस टीचर पर लगाया गया वह भी साबित नहीं हुआ।

मालूम हो कि बी-फॉर्मा फर्स्ट सेमेस्टर की स्टूडेंट सुंबुल ने बीती 3 सितंबर को डॉ. एमसी सक्सेना ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की तीसरी मंजिल की छत से कूदकर जान दे दी थी।

ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान इस छात्रा ने 5 सितंबर को देर रात दम तोड़ दिया था। इसके पिता अबु इसहाक ने कॉलेज में अपनी बेटी से रैगिंग होने का आरोप लगाया था।

उनका कहना था कि छात्रा बीते कई दिनों से परेशान चल रही थी और उन्होंने रैगिंग की शिकायत कॉलेज प्रशासन से की थी।

डायरी पर भी नहीं मिले रैगिंग के सुबूत
सुंबुल की डायरी पर भी ऐसा कुछ नहीं लिखा हुआ था, जिससे उसके रैगिंग से परेशान होने के सुबूत मिलते हों। डायरी में उसने लिखा था कि परवरदिगार मुझे पढ़ाई में अच्छा बना दीजिए।

एक पेज पर लिखा था कि मैं मर जाऊंगी और इसके बाद मम्मी आई लव यू भी लिखा था। उसने किसी पन्ने पर सुंबुल के मायने सफलता वाक्य भी लिखा था। इसके बाद फेवरेट सिंगर अल्ताफ रजा और एक्टर शाहरुख खान व रणवीर कपूर के नाम लिखे थे।

जांच कमेटी की रिपोर्ट में यह सुझाव दिए गए हैं
जांच कमेटी के चेरयमैन प्रो. जगवीर सिंह का कहना ही कि एमसी सक्सेना ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में थर्ड फ्लोर पर फर्स्ट सेमेस्टर के स्टूडेंट के क्लास चलाए जा रहे थे।

फर्स्ट सेमेस्टर के जूनियर स्टूडेंट टीचर्स व प्रशासन की नजर में रहें इसलिए उनकी क्लास ग्राउंड फ्लोर पर चलाना जरूरी है। आगे सभी इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेज ग्राउंड फ्लोर पर ही जूनियर स्टूडेंट की क्लास चलाएं।

फर्स्ट सेमेस्टर में दाखिला लेने वाले स्टूडेंट का टीचर्स व अन्य सीनियर स्टूडेंट से सीधा संवाद होना चाहिए। फ्रेशर्स अलग-अलग क्षेत्र व समुदाय के हो सकते हैं ऐसे में उनमें आपस में बोली व रहन-सहन आदि की कोई दिक्कत न हो इसलिए उनका आपस में मेल-जोल करवाया जाना बहुत जरूरी है।

फर्स्ट ईयर तक के स्टूडेंट को पढ़ाने के लिए सीनियर टीचर्स को ही जिम्मेदारी दी जाए। क्योंकि उन्हें अधिक अनुभव होता है। वे स्टूडेंट की परेशानी को अच्छे ढंग से समझ सकते हैं। वे उनकी समस्या नए टीचर के मुकाबले बेहतर ढंग से निपटा सकते हैं।

कॉलेज की एंटी रैगिंग की कमेटियां और प्रभावी ढंग से काम करें ताकि स्टूडेंट को उसकी समस्या का समाधान तत्काल किया जा सके, ताकि आगे शिकायत करने की नौबत न आए

कॉलेज में सुस्त थी एंटी रैगिंग कमेटी
सुंबुल के मामले की जांच कर रही कमेटी ने स्वीकार किया है कि यहां पर एंटी रैगिंग के लिए बनाई गई कमेटी सही तरीके से काम नहीं कर रही थी।

इस मामले का इस घटना से कोई संबंध नहीं है। क्योंकि इस मामले में रैगिंग की विस्तृत जांच हुई है और उसके कोई भी साक्ष्य नहीं मिले हैं। जांच कमेटी के चेयरमैन प्रो. जगवीर सिंह कहते हैं कि हमने यहां की एंटी रैगिंग कमेटी को सख्ती से काम करने के निर्देश दिए हैं।

वीसी करेंगे कॉलेजों का औचक निरीक्षण
जीबीटीयू के कुलपति डॉ. आरके खांडल का कहना है कि वह अब विभिन्न कॉलेजों में अचानक जाकर वहां छात्रों से बात करेंगे कि उन्हें कोई परेशानी तो नहीं है।

अगर किसी कॉलेज में ढिलाई मिली तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। छात्रों को अच्छी सुविधाएं मिलें और वे बिना किसी व्यवधान के पढ़ाई करें यह हर कीमत पर सुनिश्चित करवाया जाए।

सुंबुल के पिता जांच कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं
सुंबुल के पिता अबु इसहाक ने जीबीटीयू की जांच कमेटी की रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जांच कमेटी ने उनसे ढंग से बात तक नहीं की।

जो मोबाइल नंबर जांच कमेटी के चेयरमैन प्रो. जगवीर सिंह उपलब्ध न करवा पाने की बात कर रहे हैं वह हमने एफआईआर दर्ज करवाते समय थाने में लिखवा दिया था।

हमने प्रो. सिंह से यह भी कहा कि हम रिपोर्ट से नंबर देख कर दे देंगे। मगर दोबारा उन्होंने हमसे कोई बात नहीं की। हमने यूजीसी की सेंट्रल रैगिंग कमेटी से भी मामले की जांच करने की गुजारिश की है। अभी हमें जांच कमेटी की रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं करवाई गई है।
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हम जांच कमेटी की रिपोर्ट के हर बिन्दु को पढ़ेंगे और उसका माकूल जवाब देंगे। हम उप्र सरकार व जिम्मेदारों से उच्च स्तरीय जांच की मांग करेंगे।

कोई स्वतंत्र एजेंसी इसकी जांच करेगी तभी डॉ. एमसी सक्सेना ग्रुप जैसे लापरवाह कॉलेजों को सख्त सजा मिल पाएगी। मेरी बेटी ने कॉलेज की छत से ऐसे ही छलांग नहीं लगायी उसे सीनियर काफी समय से परेशान कर रहे थे। कॉलेज ने अगर समय रहते कोई सतर्कता बरती होती तो मेरी बेटी की मौत न होती।
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