वाइनवर्ग ऐलन स्कूल के स्थापना दिवस के मौके पर स्कूल पहुंचे पूर्व छात्र पुरानी यादों में खोए रहे।
स्कूल के 125वें स्थापना दिवस समारोह में भाग लेने आए पूर्व छात्रों का कहना था कि आज वे जिस मुकाम पर हैं इस स्कूल से मिली शिक्षा के आधार पर ही हैं। हर कोई अपनी सफलता के लिए ‘थैंक्स ऐलन’ कहता नजर आया।
स्कूल से जुड़ा दो पीढ़ियों का रिश्ता
मौजूदा छात्रों के साथ उन्होंने अपने अनुभव बांटे। कई पीढ़ियों का यह समागम सभी के लिए यादगार नजर आ रहा है। गुड़गांव के सोलोमन परिवार स्कूल को अपने लिए बहुत खास मानते हैं क्योंकि उनकी दो पीढ़ियों का इससे रिश्ता जुड़ा है।
रीयल इस्टेट कारोबारी अशोक सोलोमन 1958 से 61 तक इस स्कूल में रहे। अशोक के भाई रमेश ने 1959 में स्कूल ज्वॉइन किया। उसके बाद रमेश के बेटे अरुण सोलोमन भी यहीं पढे़ और अब तीसरी पीढ़ी भी प्रवेश के लिए तैयार है।
अशोक सोलोमन का कहना है कि किताबी शिक्षा तो हर स्कूल में दी जाती है, लेकिन इंसानियत की शिक्षा सबसे प्रमुख है। ऐलन स्कूल ने उन्हें यही सिखाया। इसीलिए यह हिंदुस्तान के अव्वल स्कूलों में शामिल है।
ऐलन ने छिपी प्रतिभा को निखारा
ऐलन के पूर्व छात्र आनंद प्रकाश ने कहा कि वाइनवर्ग ऐलन भारत के अन्य स्कूलों से एकदम अलग है। यहां बच्चे के भीतर छिपी प्रतिभा को निखारा जाता है। मुझमें आर्ट एंड क्राफ्ट का जुनून था।
माता-पिता इंजीनियरिंग कराना चाहते थे, लेकिन शिक्षकों ने आर्ट एंड क्राफ्ट के लिए प्रेरित किया। आज भारत के हर एअरपोर्ट पर उनके आर्ट एंड क्राफ्ट आउटलेट हैं। आनंद कहते हैं कि जिस स्कूल में मैं पढ़ा आज वहीं पर मेरी बेटी भी है। पुराने पल याद कर आनंद भावुक हो उठे।
पूर्व छात्रों के बीच हुई रस्साकसी
गुरुवार की सुबह स्कूल परिसर में अलग-अलग बैच के पूर्व छात्रों के बीच रस्साकशी हुई। सुबह मैराथन का आयोजन किया गया।
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