दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर दीपक पेंटल को तीस हजारी अदालत ने साहित्यिक चोरी, धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में हिरासत में लेकर तिहाड़ जेल भेज दिया।
वहीं, हाईकोर्ट ने दोपहर बाद हिरासत पर रोक लगाते हुए तुरंत रिहाई का आदेश दे दिया। दूसरी तरफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 40 हजार के व्यक्तिगत मुचलके और एक अन्य की जमानत राशि देने की शर्त पर जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति डॉ. एस. मुरलीधर ने प्रोफेसर पेंटल के अधिवक्ता के तर्क सुनने के बाद उनको हिरासत में भेजने संबंधी निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाते हुए तिहाड़ जेल प्रशासन को उन्हें रिहा करने का निर्देश दिया।
अदालत ने हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जरनल को निर्देश दिया कि इस फैसले के प्रति जेल प्रशासन को संदेश दिया जाए। साथ ही प्रोफेसर पेंटल को अगली सुनवाई के दौरान संबंधित अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है।
पूर्व कुलपति प्रोफेसर पेंटल को एक अन्य प्रोफेसर पी. पार्थ सारथी की शिकायत पर जेल भेजा गया था। पेंटल पर रसायन संबंधी साहित्य चुराकर उसका इस्तेमाल विश्वविद्यालय की लैब में इस्तेमाल करने का आरोप है। प्रो. पेंटल वर्ष 2005 से 2010 के दौरान रहे कुलपति रहे हैं और उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं।