इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व महाधिवक्ता एसएमए काजमी की मंगलवार को यूपी के प्रतापगढ़ में भदरी के समीप सड़क हादसे में मौत हो गई। वह सफारी से लखनऊ जा रहे थे, तभी भदरी चौराहे के पास बाइक को बचाने के चक्कर में ड्राइवर ने गाड़ी पर से संतुलन खो दिया। सफारी खाई में गिरकर एक पेड़ से टकराने के बाद पलट गई। उनके ड्राइवर, दामाद के भाई और एक कर्मचारी की हालत गंभीर बनी हुई है। रात में शव को पोस्टमार्टम के लिए इलाहाबाद भेज दिया गया। तीनों घायलों को भी एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इलाहाबाद में लूकरगंज निवासी एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता सैयद मोहम्मद अली काजमी (62) मंगलवार को अपने दामाद के छोटे भाई वकील सैयद इकबाल अहमद (35), सहायक शमीम (30) के साथ मुकदमे के सिलसिले में लखनऊ जा रहे थे। गाड़ी उनका ड्राइवर साबिर अली (35) चला रहा था।
साबिर के मुताबिक हथिगवां थाना क्षेत्र के भदरी चौराहे को क्रॉस करते ही टाटा सफारी के सामने बाइक सवार आ गया। उसको बचाने के लिए सफारी को दाहिनी ओर काटा। सफारी अनियंत्रित होकर खाईं में गिर गई और एक पेड़ से टकराने के बाद पलट गई।
घटना देख रहे लोगों की सांस हलक में ही अटक गई। लोग गाड़ी में फंसे लोगों को देखने के लिए दौड़ पड़े। गाड़ी का दरवाजा खोलने का प्रयास किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली। गाड़ी के अंदर फंसे लोग चीख रहे थे। लोगों ने किसी तरह ईंट आदि से दरवाजा तोड़ा और घायलों को बाहर निकाला। इस बीच मौके पर पहुंचे डॉ. लाल बहादुर पांडेय ने निजी वाहनों को रोककर सभी को कुंडा सीएचसी पहुंचाया।
कुंडा के अधिवक्ताओं को इसकी जानकारी हुई तो वह भी सीएचसी पहुंच गए। डॉक्टरों ने सीएचसी में पूर्व महाधिवक्ता को मृत घोषित कर दिया। एसआरएन में भर्ती कराए घायलों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।
उमड़ा प्रशासनिक अमला, पूर्व सांसद भी पहुंचे
पूर्व महाधिवक्ता की मौत की खबर मिलते ही अपर महाधिवक्ता कमरुल हसन सिद्दीकी, पूर्व सांसद अतीक अहमद, एसडीएम प्रदीप सिंह, सीओ सुकरामपाल तोमर, कोतवाल कुंडा आरके चंदेल, एसओ हथिगवां ज्ञानेंद्र सिंह, एसओ महेशगंज सतपाल सिंह, एसआई संगमलाल प्रजापति सीएचसी पहुंच गए।
सीएचसी में ही कराई जाने लगी पोस्टमार्टम की व्यवस्था
एसडीएम ने डीएम और सीएमओ से बात कर सीएचसी में ही पोस्टमार्टम की व्यवस्था करानी शुरू कर दी थी। हालांकि इलाहाबाद से आए अधिवक्ता इसके लिए राजी नहीं हुए। उन्होंने इलाहाबाद में मौजूद काजमी के परिजनों से अपर महाधिवक्ता से बात भी कराई। इसके बाद शव को एसआरएन अस्पताल भेजा गया।
यकीन ही नहीं हुआ कि नहीं रहे काजमी
पूर्व महाधिवक्ता एसएमए काजमी के निधन की खबर मिलते ही उनके लूकरगंज स्थित आवास पर न्यायमूर्तिगणों से लेकर वरिष्ठ अधिवक्ताओं, अदीबों, करीबियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। किसी को भी कतई यकीन नहीं हो रहा था कि उनके नहीं होने की खबर सच है।
भारतीय ज्ञानपीठ के पूर्व निदेशक रवींद्र कालिया ने कहा, वह अच्छे दोस्त थे। उन्होंने संघर्षो की आंच में तपकर अपनी जगह खुद बनाई। डॉ.उर्मिला जैन ने कहा, काजमी साहब से मेरे परिवार का पुराना नाता रहा। वह मददगार और मिलनसार थे। यश मालवीय ने कहा, साहित्य के साथ सांप्रदायिक सद्भाव के लिए उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
प्रोफेसर एए फातमी ने कहा, मेरा तो दायां बाजू ही टूट गया। उनके जाने के साथ ही तमाम संस्थाएं भी यतीम हो गईं। अदब के लिए उनकी जबर्दस्त समझ ने ही मुझे उनका दोस्त बनाया। यह दोस्ती तकरीबन 35 बरस पुरानी रही। काजमी साहब कहते थे, तुम्हारी हमारी जोड़ी कल्याणजी आनंदजी वाली है। असरार गांधी ने कहा, काजमी साहब जितने अच्छे अदब के सरपरस्त, उतने ही अच्छे दोस्त भी थे। मेहमाननवाजी में उनका कोई जबाब नहीं था।
अंजुमन रूहे अदब के सचिव कर्नल अबरार अहमद ने कहा कि काजमी का जाना अदब का बहुत बड़ा नुकसान है। इसी तरह फज्ले हसनैन, एहतराम इस्लाम, जफर बख्त, डॉ.फाजिल हाशमी, नदीम शिराजी, लईक रिज़वी, अफजाल फाखरी ‘जज्बी’, खुर्शीद हसन आदि ने भी उनके जाने को शहर का बड़ा नुकसान बताया है।