देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज के ऑडिट में धांधली का आरोप लगा तो छात्रों ने ईसी रोड जाम कर हंगामा किया। पुलिस ने छात्रों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने।
सड़क से जबरन उठाने के प्रयास में पुलिस और छात्रों में धक्का-मुक्की हुई। दारोगा के हाथ में दांत मारने पर हुई गरमा-गरमी के बीच पुलिस ने लाठियां चला दी। पुलिस ने बल प्रयोग कर छात्रों को खदेड़ दिया। इसमें कई छात्रों और पुलिस कर्मियों को चोटें आईं। हिरासत में लिए गए 12 छात्रों को निजी मुचलकों पर शाम को रिहा कर दिया गया। घायल छात्रों के मेडिकल कराने पर पुलिस मामले में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी में है। जाम से थमे ट्रैफिक में स्कूली बच्चे और एंबुलेंस तक फंसी रही।
डीएवी कॉलेज के ईसी रोड स्थित कैंप कार्यालय में ऑडिट में खानापूर्ति का आरोप लगाते हुए छात्र संगठन शुक्रवार रात से आंदोलनरत हैं। छात्रों के ऑडिट टीम को बंधक बनाने के बाद देर रात पुलिस-प्रशासन ने ऑडिट प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। छात्र मामले की जांच कराने की मांग कर रहे थे। अधिकारियों से बात भी हुई लेकिन आशा के अनुरूप जवाब नहीं मिलने पर छात्र शनिवार दोपहर सड़क पर उतर आए।
जाम लगने के बाद पुलिस ने छात्रों को समझाने के प्रयास किए। एसपी सिटी अजय सिंह ने छात्रों से कहा कि पहले रास्ता खोल दें, उनकी हर मांग पर गंभीरता से बात होगी। लेकिन छात्र हंगामा करते हुए सड़क पर लेट गए। जाम की वजह से हर तरफ ट्रैफिक थम गया। पुलिस ने गिरफ्तारी करने की बात कहकर छात्रों को उठाने का प्रयास किया।
इसके बाद छात्र चेन बनाकर कार्रवाई का विरोध करने लगे। एक बार तो पुलिस ने 19 छात्रों को जबरन उठाकर पीएसी के वाहन में चढ़ा दिया, लेकिन छात्र हंगामा करते हुए नीचे आ गए। एसपी सिटी से छात्रों की झिक-झिक हुई। पुलिस ने फिर छात्रों को उठाकर पुलिस वाहन में बैठाना शुरू किया। पुलिस कर्मी छात्रों को पुलिस लाइन ले जाने लगे तो दूसरे छात्र वाहन के आगे आ गए।
उन्हें हटाकर पुलिस ने वाहन को चलता किया। बच गए छात्र फिर सड़क पर लेट गए। जबरन उठाने को लेकर एक सिपाही से धक्का-मुक्की के साथ दारोगा नरेश राठौड के हाथ पर किसी छात्र ने दांत धंसा दिए। इस पर पुलिस ने लाठियां चलाकर छात्रों को दौड़ा दिया। कैंप कार्यालय के अंदर तक लाठियां फटकार कर खदेड़ा गया।
निरंकार और कुलवंत समेत कई छात्रों ने मेडिकल कराया। निरंकार के हाथ में चोट आई है। दारोगा नरेश राठौड और तीन सिपाहियों ने भी मेडिकल कराया। छात्रों को हटाने के बाद यातायात खोला गया, फिर भी एक घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही।
संवैधानिक तरीके से छात्रों को मांग उठाने का अधिकार है। छात्रों को जाम की वजह से हजारों लोगों को होने वाली दिक्कत का ध्यान रखना चाहिए था। गिरफ्तारी करने के साथ रास्ता खुलवाने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा है। छात्रों की कोई समस्या है तो संबंधित अधिकारियों से बात करके मामले को सुलझाया जा सकता है।
- अजय सिंह, पुलिस अधीक्षक नगर
ऑडिट के नाम पर लाखों की हेराफेरी की शिकायत को न प्रशासन और ना शिक्षा सचिव ने गंभीरता से लिया है। मजबूरन उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। पुलिस ने उनके साथ जबरदस्ती की है, मुख्यमंत्री को इस मामले का संज्ञान लेकर जांच करानी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके।
- सचिन थपलियाल, महासचिव छात्र संघ
छात्र-छात्राओं की यह मुहिम भ्रष्टाचार के खिलाफ है। फंड उनका होने के कारण पाई-पाई का हिसाब जानने का उन्हें अधिकार है। जाम के दौरान पुलिस ने उनके साथ क्रिमिनल जैसा व्यवहार किया। मांग पूरी होने तक छात्र संगठन चुप बैठने वाले नहीं है।
- स्वाति नेगी, एनएसयूआई