राजधानी के तीन कॉलेजों को फर्जी पंजीकरण साबित होने पर परीक्षा केंद्रों की सूची से बाहर कर दिया गया लेकिन फर्जी पंजीकरण पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, जबकि फर्जी पंजीकरण निरस्त करने के निर्देश दिए गए थे।
सूत्रों के अनुसार, राजधानी में करीब 15 हजार फर्जी रूप से पंजीकृत परीक्षार्थी शामिल होने की तैयारी में हैं। यूपी बोर्ड में हर साल स्कूल में स्टूडेंट्स न होने के बावजूद बाहरी बच्चों के फॉर्म भरवाए जाते हैं।
बाद में शिफ्टिंग सूची में खेल किया जाता है। इस साल राजधानी के नन्हे सिंह स्मारक इंटर कॉलेज ने एक कक्षा में एक हजार से ज्यादा दाखिले कर डाले।
फर्जी पंजीकरण की पुष्टि होने पर नन्हे सिंह स्मारक, शेखर आजाद इंटर कॉलेज, सेंट फ्लोरेंस नाइटेंगल इंटर कॉलेजों को इस साल केंद्र नहीं बनाया गया। अब मामला फर्जी पंजीकरण को स्थगित करने पर अटका हुआ है पर अभी तक इस संबंध में कोई तेजी नहीं दिख रही है।
इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक पीसी यादव का कहना है कि पहली प्राथमिकता परीक्षा केंद्रों की घोषणा थी जो की जा चुकी है। स्टूडेंट्स में कौन से फर्जी हैं इसकी पहचान करना काफी कठिन है। इस पर विचार चल रहा है। शासन के निर्देश के हिसाब से ही कार्रवाई की जाएगी।