देहरादून के डीएवी कॉलेज में फर्जी दाखिलों की आशंका सही साबित हुई। गुरुवार को कॉलेज प्रशासन ने आखिरी दिन एससी और एसटी वर्ग में हुए दाखिलों की जांच की तो 13 फर्जी मामले पकड़ में आए।
छात्रों ने फर्जी एडमीशन के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए थे। डीएवी कालेज में बीए द्वितीय और तृतीय वर्ष में एससी और एसटी वर्ग में हुए रिकार्ड दाखिलों पर आर्यन ग्रुप ने सवाल खड़ा किया था।
प्राचार्य से की शिकायत
छात्र नेता अनिल तोमर ने इस संबंध में प्राचार्य से लिखित शिकायत की थी। तोमर का आरोप था कि कुछ छात्र नेताओं ने वोट का जुगाड़ करने के लिए करीब एक हजार फर्जी दाखिले कराए हैं।
कॉलेज प्रशासन ने गुरुवार को जांच की तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। कुछ छात्रों ने किसी और की मार्कशीट को स्कैन कर उस पर अपना नाम टाइप कर दाखिला करा लिया था।
निरस्त होंगे दाखिले
कुछ फेल हुए छात्रों ने अपनी मार्कशीट को स्कैन कर नई मार्कशीट तैयार कर दाखिला लिया है। कुछ ऐसे भी छात्र हैं जिन्होंने खुद ही आय प्रमाण पत्र बना लिया। कॉलेज प्राचार्य ने बताया कि ऐसे सभी दाखिलों का निरस्त किया जाएगा।
एसएमएस सेवा फेल
डीएवी कॉलेज में कोई नई व्यवस्था लागू करना मुसीबत से कम नहीं है। एडमीशन पर छात्र को एसएमएस भेजने की व्यवस्था भी कुछ ही दिनों में ठप हो गई है।
कॉलेज में दाखिले तो हो रहे हैं लेकिन दावे के मुताबिक छात्रों को एसएमएस से सूचना नहीं भेजी जा रही है। नतीजतन छात्र आईकार्ड के लिए भटक रहे हैं। छात्रों को परेशानी से बचाने लिए कालेज में एसएमएस सुविधा इसी साल से शुरू की गई थी।
कहां भेजे जा रहे एसएमएस
छात्रों को बताया गया था कि एसएमएस मिलने के दो दिन बाद वे अपना आईकार्ड प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन, यह सेवा ज्यादा दिन नहीं चल पाई।
कई छात्रों को एसएमएस नहीं मिला तो कई एसएमएस मिलने के बावजूद आईकार्ड के लिए भटक रहे हैं। गुरुवार को छात्र नेता आरुषि ने प्राचार्य से इस संबंध में शिकायत की।