मोदी सरकार देश में शिक्षा का स्तर सुधारने में जुटी है। वहीं, इस राज्य के स्कूलों में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां फेलो टीचिंग के नाम पर ऐसे टीचर्स भर्ती किए गए हैं, जो खुद मुख्य विषयों में फेल हुए हैं। ये स्कूल पंजाब के हैं और यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ आरटीआई में।
एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने आरटीआई के माध्यम से तरनतारन जिले के ईटीटी शिक्षकों के दसवीं में अंकों की जानकारी मांगी थी। जिले से 36 शिक्षक ऐसे निकले, जो दसवीं की परीक्षा में अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक शिक्षा और हिंदी जैसे विषयों में पास नहीं हुए थे।
इनमें एक शिक्षक तो अंग्रेजी विषय में एक अंक ही हासिल कर पाया था जबकि अन्य शिक्षक मुख्य विषयों में भी सात से 14 अंक ही प्राप्त कर सके थे। प्रदेश भर में ऐसे शिक्षक फेलो टीचिंग के नाम पर भर्ती किए गए थे और तीन साल सेवा निभाने के बाद उन्हें ईटीटी शिक्षकों के तौर पर नियमित कर प्राइमरी स्कूलों में लगा दिया गया।
शिकायतकर्ता ने की शिक्षकों का टीईटी कराने की मांग
अब सरकार को नोटिस भेजकर चेतावनी दी गई है कि ऐसे शिक्षकों की शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) ली जाए। साथ ही इनकी ड्यूटी उन विषयों को पढ़ाने में न लगाई जाए, जिनमें वह स्वयं ही पास नहीं हो सके।
एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने सरकार को नोटिस भेज कर मांग की है कि ऐसे शिक्षकों का टेस्ट तो लिया जाना ही चाहिए। जिन विषयों में वह खुद ही पास नहीं हो सके, उन्हें ऐसे विषय पढ़ाने से रोका जाए। ऐसे शिक्षकों को एक शिक्षक वाले स्कूलों से शिफ्ट कर कई शिक्षकों वाले स्कूल में भेजा जाए।
ईटीटी भर्ती के लिए दसवीं में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों सहित उत्तीर्ण रहने की शर्त शामिल की जानी चाहिए। अरोड़ा ने चेतावनी दी है कि एक महीने में ऐसा नहीं हुआ तो वह हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे।
सरकार द्वारा किए गए बदलाव ही जिम्मेदार
सरकार को भेजे नोटिस में एडवोकेट अरोड़ा ने दसवीं पास होने के लिए समय-समय पर किए गए बदलावों को जिम्मेदार ठहराया है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने दसवीं पास करने के लिए पंजाबी विषय में पास होना अनिवार्य कर दिया था।
भले ही अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक शिक्षा या हिंदी में से किसी एक विषय में छात्र फेल रहा हो, लेकिन पंजाबी के साथ अन्य विषयों में न्यूनतम अंक हासिल करने वाला पास कर दिया जाता है।