सीबीएसई के बारहवीं में ऑल इंडिया टॉपर सार्थक अग्रवाल ने टॉप किया है। दिल्ली पब्लिक स्कूल, वसंत कुंज के साइंस स्ट्रीम के सार्थक ने पांच सौ में से 498 अंक हासिल किए हैं। यही नहीं, उन्होंने चार विषयों में तो उनके सौ फीसदी अंक हैं।
अंग्रेजी में 98, ईको में 100, गणित में 100, फिजिक्स 100 और केमिस्ट्री में 100 अंक।
सार्थक अग्रवाल के इस सफलता के पीछे उनके परिवार का योगदान तो है ही साथ ही फेसबुक की भी इसमें एक अलग तरह की भूमिका है।
नहीं किया था ट्यूशन-कोचिंग
टॉपर सार्थक का कहना है कि जीवन में लक्ष्य बेहद जरूरी है। अगर किसी के पास लक्ष्य नहीं तो सफलता नहीं हासिल की जा सकती। सार्थक साइंस स्ट्रीम के ऑल इंडिया टॉपर होने के साथ-साथ सभी स्ट्रीम में सबसे ज्यादा अंक पाने वाले छात्र भी बने हैं।
लेकिन ताज्जुब की बात ये है कि आमतौर साइंस लेने के बाद छात्र स्कूल के अलावा ट्यूशन कोचिंग का सहारा ले लिया करते हैं लेकिन सार्थक ने किसी भी विषय के लिए ट्यूशन कोचिंग नहीं किया था।
सार्थक तो अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों परिवार के सदस्यों और अपनी मेहनत को देते हैं। लेकिन साथ ही इसमें फेसबुक की एक अनोखी भूमिका की भी बात करते हैं।
ये है फेसबुक की भूमिका
आजकल के छात्रों में सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक का गजब का क्रेज रहता है। बिरले ही होते हैं, जो सारी सुविधाएं होने के बावजूद फेसबुक से दूरी बनाए रखते हैं।
सार्थक भी उन्हें बिरले छात्रों में से एक हैं। अपने माता-पिता की इकलौती संतान होने की वजह से अभिभावकों ने हमेशा कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराए रखी।
लेकिन पढ़ाई में ध्यान लगाने के लिए उन्होंने फेसबुक पर एकाउंट तक नहीं बनाया है। वह कहते हैं कि पढ़ाई में ध्यान लगाकर रखा लिहाजा कभी इतना टाइम ही नहीं मिला कि फेसबुक से जुड़ें।
फिर खाली समय में क्या करते हैं सार्थक
सार्थक को क्रिकेट व टेबल टेनिस खेलना पसंद है और जब भी पढ़ाई के बाद समय मिलता है तो वह अपना समय परिवार के लोगों के बीच व फिल्म देखकर बिताते हैं।
बिना ट्यूशन के यह सफलता हासिल करने वाले सार्थक की नजर अब सेंट स्टीफंस व श्रीराम स्कूल ऑफ कॉमर्स में ईको ऑनर्स करने की है।
अपने माता-पिता की इकलौती संतान सार्थक ने बताया कि वह अपने हर काम पर फोकस रखते हैं।
ये है सार्थक का अल्टीमेट गोल
ग्रेजुएशन के बाद वह एमबीए और सिविल सर्विसेज की तैयारी करना चाहते हैं। टॉपर्स टिप्स पर उनका कहना है कि समय प्रबंधन के साथ पढ़ाई करें।
कम समय केलिए ही पढ़ाई करें लेकिन पूरी तरह से उसमें ध्यान लगाएं। उनके पिता सुशील चंद्रा एक व्यवसायी हैं और उनकी मां नीरज चंद्रा गृहणी।
सार्थक अपने अंकों के बारे में कहते हैं कि यह तो पता था कि रिजल्ट अच्छा रहेगा लेकिन ऐसा रिजल्ट आ जाएगा यह नहीं पता था। उनके ऑल इंडिया टॉपर बनने पर उनके घर में दीवाली जैसा माहौल है।