एलयू अब प्रवेश के समय ही स्टूडेंट्स से परीक्षा फॉर्म भरवाने की व्यवस्था करेगा। इसके बाद डिग्री कॉलेज अपने यहां दाखिले में खेल नहीं कर पाएंगे।
वे अपने यहां कोर्सेज की निर्धारित सीटों के मुकाबले अधिक दाखिला करेंगे तो उन्हें तत्काल पकड़ लिया जाएगा। इससे वसूली पर रोक लग सकेगी।
अभी पूरे साल पढ़ाई करवाने के बाद परीक्षा से पहले जब परीक्षा फॉर्म भरवाने का नंबर आता है तो कॉलेज स्टूडेंट्स से मनमानी वसूली करने लगते हैं। रकम न देने पर स्टूडेंट को परीक्षा न बैठने देने की धमकी दी जाती है।
कॅरिअर चौपट न हो इस कारण स्टूडेंट कॉलेज की हर बात मानने को मजबूर होते हैं लेकिन अब यूनिवर्सिटी प्रशासन पूरी व्यवस्था को पारदर्शी करने में जुटा हुआ है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन अभी डिग्री कॉलेजों के स्टूडेंट्स का रिकॉर्ड लेने के लिए परीक्षा फॉर्म भरवाता है। अभी तक जो व्यवस्था है वह परीक्षा के पहले फॉर्म भरवाए जाते हैं।
कई बार तो परीक्षाएं शुरू होने के एक-दो दिन पहले तक परीक्षा फॉर्म विलंब शुल्क के साथ जमा होते हैं। इसका फायदा कॉलेज वाले उठाते हैं।
करीब चार साल पहले स्वतंत्र गर्ल्स कॉलेज ने बीकॉम की मान्यता न होने के बावजूद 126 छात्राओं को दाखिला दे दिया था। यूनिवर्सिटी ने बाद में इसकी मान्यता खत्म कर दी थी।
अभी हाल ही में स्वामी विवेकानंद लॉ कॉलेज ने एलएलबी (त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम) के प्रथम सेमेस्टर में निर्धारित 120 सीटों के मुकाबले 300 स्टूडेंट को दाखिला दे दिया।
यूनिवर्सिटी ऐसा ठोस उपाय करना चाहती है, ताकि आगे हमेशा के लिए इस समस्या से निजात मिल जाए। यूनिवर्सिटी कॉलेज को प्रवेश प्रक्रिया के समय सिर्फ उतने ही परीक्षा फॉर्म जारी करेगी जितनी उसके यहां पर सीटें हैं।