राजधानी में पहली बार ऐसा हो रहा है कि मार्च-अप्रैल में ही यूनिवर्सिटीज में स्नातक (यूजी) व परास्नातक (पीजी) कोर्सेज में दाखिले के लिए फॉर्म जारी किए जा रहे हैं।
दरअसल, सभी यूनिवर्सिटीज को दरकार है कि उनके यहां अधिक से अधिक स्टूडेंट्स हों। शैक्षिक सत्र 2014-15 बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी (बीबीएयू) ने मार्च में ही फॉर्म जारी कर दिए।
बीबीएयू की ओर से सबसे पहले फॉर्म जारी करने के बाद दूसरी सभी यूनिवर्सिटी अलर्ट हो गईं और जो प्रवेश प्रक्रिया 14-15 मई के आसपास शुरू होती थी, वह इस बार अप्रैल में ही शुरू होने जा रही है।
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि कहीं यूनिवर्सिटी के हाथ से स्टूडेंट न निकल जाएं। विश्वविद्यालय नए खुले हैं, उन्हें अपने यहां हर साल दाखिले का ग्राफ बढ़ाना है तो सबसे पुरानी लखनऊ यूनिवर्सिटी के सामने बीते वर्षों में स्टूडेंट्स की घटी संख्या में सुधार लाना है।
अभी यहां केवल 18,500 के स्टूडेंट हैं। कुलपति डॉ. एसबी निमसे अपने कार्यकाल में इसे कम से कम 25 हजार करने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं।
लखनऊ यूनिवर्सिटी ने अपने यहां यूजी और पीजी दोनों के को-ऑर्डिनेटर इस बार मार्च में ही तय कर दिए। अब अप्रैल में यहां पर ऑनलाइन फॉर्म जारी करने की तैयारी है।
इस बार पहले प्रक्रिया शुरू करने के पीछे जहां एक ओर यूनिवर्सिटी प्रशासन तर्क दे रहा है कि प्रवेश प्रक्रिया निर्धारित समय पर पूरी हो। वहीं दूसरी ओर, उसका इरादा अपने यहां अधिक से अधिक सीटें भरने का भी है।
कारण, बीबीएयू ने ऑनलाइन फॉर्म मार्च में ही जारी कर दिए। एलयू ने पीजी कोर्सेज में नए सत्र 2014-15 में चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू करने की घोषणा की है।
सिर्फ एलयू ही नहीं उप्र विकलांग उद्धार डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी ने भी तैयारी शुरू कर दी है। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी में भी प्रॉस्पेक्टस तैयार करने का काम शुरू हो गया है।
यूनिवर्सिटी अभी पिछले साल ही शुरू हुई है। इसलिए यहां पर करीब 500 स्टूडेंट ही पढ़ते हैं।