अंग्रेजी लिखना, पढ़ना और बोलना बेहद आसान है। जरूरत है थोड़ी सी मेहनत और कुछ तकनीक के इस्तेमाल की।
डायट केंद्र पर आयोजित हुई दो दिवसीय कार्यशाला में प्रशिक्षक डॉ. मार्क रॉबिंसन ने शिक्षकों को अंग्रेजी पढ़ाने के गुर सिखाए। उद्देश्य था क्लास रूम टीचिंग में नई तकनीकों का प्रयोग किया जाए।
ताकि बच्चों में अंग्रेजी रटने के बजाय लिखने, पढ़ने और बोलने में दक्षता आए। कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और रेलो (रीजनल इंग्लिश लैंग्वेज एसोसिएशन) के सहयोग से हुआ।
कार्यशाला में लखनऊ के साथ ही पांच अन्य जिलों से कुल 30 अंग्रेजी शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यशाला में शिक्षकों को बताया गया कि किस प्रकार केवल पाठ्य पुस्तक का प्रयोग करके ही बच्चों को लिखने, पढ़ने और बोलने की तरीके सिखाए जा सकते हैं।
कार्यशाला में शिक्षकों को ग्रुप में बांटकर कुछ प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें अंग्रेजी भाषा में किसी चित्र के बारे में पहले बताना और उसके आधार पर शिक्षकों को चित्र बनाना था।
चित्र बनाने के बाद उसे बनाने वाले शिक्षक को उसकी व्याख्या भी करनी थी। इसी तरह ‘मिसिंग गोट’, ‘4 इन टू 4 स्कवॉयर ’ क्रियात्मक प्रतियोगिताओं के माध्यम से शिक्षकों को वो तकनीकें सिखाई गईं।
जिनका उपयोग उन्हें क्लास रूम में करना था। प्रशिक्षक डॉ. मार्क रॉबिंसन के अनुसार कार्यशाला का उद्देश्य है कि शिक्षक पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए स्टूडेंट्स की सहभागिता भी सुनिश्चित करें।
स्टूडेंट्स की एन्वॉल्वमेंट बढ़ेगी तो अंग्रेजी लिखने, बोलने और समझने की हिचक खत्म होगी। इस तरह से अंग्रेजी उनके लिए आसान भाषा होगी। कार्यशाला में भाग लेने वाले शिक्षकों के लिए जनवरी में दूसरे सत्र का आयोजन होगा।