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खतरे में एजुकेशन हब, मुफ्त में होंगे एडमिशन!

Tue, 24 Jun 2014 05:48 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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औद्योगिक सिटी का तमगा खो चुके गाजियाबाद के एजुकेशन हब पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। शिक्षा के स्तर में गिरावट, विवि की लचर कार्यप्रणाली और कालेजों की बहुतायात के चलते छात्र पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों की ओर रुख करने लगे हैं।
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कालेजों में खाली सीटों को भरने के लिए अब छात्रों को फ्री में एडमिशन के आफर दिए जा रहे हैं। ए और बी कैटेगरी में आने वाले महानगर के टाप 20 इंजीनियरिंग कॉलेजों को छोड़कर बाकी की हालत खस्ता है। एकेडमिक स्तर पर सुधार न होने सी कैटेगरी में आने वाले कॉलेज बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं।

पिछले साल काउंसलिंग में नहीं खुला कई कालेजों का खाता
इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों में प्रवेश केलिए यूपीएसईई की पिछले साल की काउंसलिंग ने लोगों को हैरान कर दिया। अपग्रेडेशन राउंड से पहले तक चली काउंसलिंग प्रक्रिया में चार इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन का खाता नहीं खुल सका। 10 कॉलेजों का आंकड़ा 12 सीटों के अंदर सिमट गया।
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वहीं 15 के करीब संस्थानों में केवल पांच फीसदी ही सीटें भर पाई थी। टॉप कॉलेजों की तरह फैकल्टी की तरफ ध्यान न देना, खराब प्लेसमेंट, सुविधाओं का अभाव भी छात्रों के रुख में बदलाव की बढ़ी वजह है।

सीटें भरने के लिए कर रहे सभी जतन
एडमिशन के सीजन में महानगर में कॉलेजों के पोस्टर और बोर्ड की बाड़ आ गई है। सीटें नहीं भरने के चलते तमाम कॉलेज छात्रों को फ्री में एडमिशन देने तक का प्रलोभन दे रहे हैं। साथ ही एडमिशन के लिए स्कॉलरशिप, लैपटॉप, टेबलेट, फीस में छूट तक केऑफर दिए जा रहे हैं।

सीटें न भरने से कोर्स कर रहे सरेंडर
जिले में 48 इंजीनियरिंग, 35 मैनेजमेंट, 65 बीएड और नौ डिग्री कॉलेज हैं। इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेज सीटें नहीं भरने से कोर्स सरेंडर कर रहे हैं। पिछले दो महीने में आधा दर्जन से ज्यादा कॉलेज एमबीए, एमसीए और आईटी ब्रांच जैसे कोर्सेज को सरेंडर कर चुके हैं। सबसे ज्यादा खराब हालत मैनेजमेंट कॉलेजों की है।
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