हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में यूजी डिग्री में रूसा सीबीसीएस लागू करने के बाद खड़ी मुसीबतों के बीच अब एक और मुश्किल आन पड़ी है। सिस्टम को लागू करने के लिए तैनात कंसलटेंट का अनुबंध 31 मई को समाप्त हो रहा है। कंसलटेंट ने विवि प्रशासन को अपने स्तर पर बंदोबस्त करने की हिदायत दे दी है।
नए सिस्टम को लागू करने में आत्म मुग्ध विवि के रूसा कंसलटेंट का अनुबंध 31 मई को समाप्त हो रहा है। सीबीसीएस का ई शिक्षा परीक्षा साफ्टवेयर अब तक पूरा नहीं हुआ है। दूसरे सत्र के करीब 18000 छात्रों का परीक्षा परिणाम भी लटका पड़ा है।
प्रथम सत्र के घोषित परिणाम के भी करीब दो हजार से अधिक छात्रों का रिजल्ट सेटल नहीं हो सका है। कंसलटेंट जो कक्षाओं के साथ साफ्टवेयर तैयार कर रहा है अब आगे सेवाएं न दे पाने की लिखित में सूचना दे चुका है। विवि प्रशासन सूचना मिल जाने के बावजूद अब तक इसका विकल्प नहीं तलाश पाया है। अनुबंध पूरा होने को सिर्फ एक माह का समय शेष है।
इसी बीच सीबीसीएस यूजी के पहले और दूसरे बैच की दूसरे और चौथे सत्र की परीक्षाएं भी होनी हैं। ऐसे में अगर कंसलटेंट काम छोड़ गया और उसकी जगह कोई विकल्प न मिला तो विवि के लिए एक गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी। एक लाख के मासिक वेतन पर रखे कंसलटेंट के सहारे ही नया आनलाइन सिस्टम चल रहा है। इसमें प्रवेश से लेकर परिणाम घोषित होने तक की ऑनलाइन एप्लीकेशन तैयार है।
सेमेस्टर दर सेमेस्टर बन रहा था सॉफ्टवेयर- यूजी में सीबीसीएस लागू करने की कंसलटेंट को सेमेस्टर के हिसाब से एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। अब कंसलटेंट ने आगे का कार्य न करने की बात कही है। ऐसे में सवाल उठा रहा है कि चौथे सेमेस्टर और इससे आगे के दो सेमेस्टर का एप्लीकेशन साफ्टवेयर कौन डवेल्प करेगा। वहीं रुके परीक्षा परिणाम को निकालना भी विवि के लिए मुश्किल होगा।
कंसलटेंट ने कुलपति सहित प्रति कुलपति, सीओई, तत्कालीन डीन प्लानिंग और कंप्यूटर सेंटर इंचार्ज को ई मेल कर व्यवस्था दुरुस्त को कहा है। विवि के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने कहा कि कंसलटेंट का विकल्प तलाशने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जरूरत पड़ी तो उसी को दोबारा अनुबंध पर रखा जा सकता है।