दिल्ली विश्वविद्यालय में विभागीय व कॉलेज स्तर पर शिक्षकों पर कार्रवाई करने का अधिकार कुलपति को देने और कुलपति को दूसरा कार्यकाल प्रदान करने के प्रस्ताव को कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में पेश किया जाएगा। इसी वजह से बृहस्पतिवार को होने वाली ईसी की बैठक के हंगामेदार होने के आसार बनते दिख रहे हैं।
वहीं, डूटा ने इन दोनों विषयों को बैठक में लाए जाने का विरोध किया है। डूटा ने इन प्रस्तावों पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रपति से गुहार की है। डूटा अध्यक्ष डॉ. नंदिता नारायण ने बताया कि इन विषयों को ईसी की बैठक में लाकर कुलपति, एफवाईयूपी को लेकर शिक्षकों के विरोध को किसी तरह से दबाना चाहते हैं।
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इसी कारण वह यूजीसी के कोड ऑफ प्रोफेशनल एथिक्स को हथियार बनाकर शिक्षकों पर कार्रवाई करने का अधिकार चाह रहे हैं। मालूम हो कि अभी तक शिक्षकों पर सीधे कार्रवाई करने का अधिकार कुलपति के पास नहीं है। शिक्षकों पर कार्रवाई प्रबंध समिति के माध्यम से राष्ट्रपति से अनुमति मिलने के बाद ही संभव हो पाती है।
लेकिन यदि बैठक में लाए जा रहे विषय को हरी झंडी मिल गई तो कुलपति अपनी मर्जी से किसी को भी बर्खास्त व निलंबित कर सकेंगे। डूटा अध्यक्ष ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक पत्र का हवाला देते हुए कुलपति को दूसरा कार्यकाल प्रदान करने के लिए हो रही कोशिश का भी विरोध किया है।
अब तक डीयू मे कुलपति का कार्यकाल पांच साल का ही है। वहीं शिक्षक संगठन एएडी ने भी बैठक में कुलपति के दूसरे कार्यकाल का विरोध किए जाने की बात कही है।