दिल्ली विश्वविद्यालय के 2015-16 शिक्षण सत्र में छात्रों को दाखिले के लिए प्रॉस्पेक्टस नहीं मिलेगा। दाखिला कमेटी ने पर्यावरण और पेड़ बचाने की मकसद से यह फैसला लिया है। प्रॉस्पेक्टस प्रिंट नहीं हुआ तो यह वेबसाइट्स पर उपलब्ध होगा। डीयू बीते साल तक प्रॉस्पेक्टस छापता रहा है, ये 100 रुपये में छात्रों को ओएमआर फॉर्म के साथ उपलब्ध होता था।
डीयू प्रत्येक वर्ष 75 कॉलेजों में कुल 54 हजार छात्रों को दाखिले के लिए आवेदन मंगाता है। इसके लिए 2.5 लाख प्रॉस्पेक्टस बेचे जाते हैं। इसका प्रिंटिग चार्ज भी लाखों में होता है। डीयू नए शिक्षण सत्र में इसे लागू करता है तो वह प्रिंट कराने का खर्चा भी बचाएगी।
दिल्ली के जामिया विश्वविद्यालय इसे पहले ही लागू कर चुका है। हालांकि, डीयू ने प्रॉस्पेक्टस के फैसले को कॉलेजों पर छोड़ दिया है। कॉलेज चाहते हैं तो वह बेच सकते हैं, लेकिन विश्वविद्यालय कोशिश होगी की प्रॉस्पेक्टस उसे ही बेचा जाए जो ऑनलाइन के विकल्प तक नहीं पहुंच पाता है।
डीयू प्रशासन का मानना है कि सब कुछ ऑनलाइन होता है तो इससे ऑनलाइन ट्रैफिक पर ज्यादा काम करना होगा। ताकि, छात्रों को ऑनलाइन आवेदन के दौरान दिक्कत ना आए।