दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में उच्च कटऑफ का असर शहर के कॉलेजों पर पड़ेगा। पहली कटऑफ के तहत 99 फीसदी से अधिक कटऑफ की वजह से शहर के कॉलेजों में अधिक कटऑफ जाने की संभावना है।
वहीं, शहर के कई छात्रों को डीयू के कॉलेजों में दाखिला मिलना मुश्किल है, क्योंकि शहर का रिजल्ट इस बार उतना बेहतर नहीं रहा है।
डीयू में अधिक कटऑफ होने की वजह से छात्रों को मनचाहा कॉलेज नहीं मिलेगा। ऐसे में छात्र शहर के कॉलेज में ही दाखिला लेना उचित समझेंगे। अब डीयू और एमडीयू दोनों जगहों पर तीन साल के कोर्स हो गए हैं। शहर के स्कूलों पर नजर डालें तो टॉप स्कूल के 12वीं कक्षा के छात्रों के अधिकतम अंक वालों में 90-95 फीसदी वाले छात्र अधिक हैं।
बता दें कि सीबीएसई में जिले का रिजल्ट 82.84 फीसदी था। जिसमें 90 फीसदी से अधिक प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या 36.49 फीसदी है। वहीं आईसीएसई में 90 फीसदी से अधिक अंक वाले 27.16 फीसदी छात्र है। जबकि दिल्ली के टॉप कॉलेज में 95-99 फीसदी के बीच कटऑफ है। डीयू के साथ ही एमडीयू के कॉलेजों में मेरिट लिस्ट जारी होगी। इसकी वजह से भी छात्रों का रूख एमडीयू के कॉलेजों में हो सकता है।
हरियाणा बोर्ड की राह होगी कठिन
हरियाणा बोर्ड के छात्रों के लिए कॉलेज में दाखिला कठिन होगी। इनका सामना सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के छात्रों से होगा। हरियाणा बोर्ड में 90 फीसदी से अधिक अंक वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई थी। 12वीं कक्षा का रिजल्ट 72.86 फीसदी रहा है, लेकिन 90 फीसदी से अधिक अंक वाले छात्रों में सात फीसदी की कमी आई थी। कुल रिजल्ट का महज दो फीसदी छात्र ही गुड़गांव में 90 फीसदी से अधिक अंक पाए थे। 80 से 90 फीसदी वाले छात्रों की संख्या 14 फीसदी है। 70 से 80 फीसदी वाले छात्रों की संख्या 36 फीसदी है।
मनोज कुमार सैनी जो पूर्व प्रिंसिपल व शिक्षाविद हैं ने बताया कि डीयू और एमडीयू में एक साथ दाखिला होने से छात्र जो पहले मिलेगा। वहां एडमिशन लेंगे, क्योंकि डीयू में पहले और दूसरे कटऑफ के बाद अमूमन जगहों में हॉट कोर्स में सीटें फुल हो जाती है।