राजकीय दून मेडिकल कॉलेज को मान्यता के लिए एक और मौका एमसीआई ने दिया है। इसके लिए एक माह के भीतर कॉलेज को अपनी सारी तैयारियां पूरी करनी होगी।
एमसीआई ने कॉलेज के नाम इस संबंध में एक पत्र भेजा है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की एग्जीक्यूटिव कमेटी की टीम ने पांच और छह जनवरी 2016 को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में कई खामियां सामने आई थी।
हालांकि टीम ने एक और मौका देने का संकेत दिया था। इसी संबंध में बुधवार को दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन को एमसीआई का पत्र प्राप्त हुआ। पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कुछ खामियां हैं, जिन्हें एक माह में दूर करना होगा।
इसमें राजकीय दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के अलावा कॉलेज परिसर में भी कुछ कमियां शामिल हैं। साथ ही एमसीआई ने फैकल्टी की कमी भी जल्द दूर करने के लिए कहा है। मेडिकल कॉलेज में कुछ उपकरणों की कमी भी बताई गई है।
मेडिकल कॉलेज की सभी कमियां दूर करने के लिए युद्ध स्तर पर काम शुरू हो चुका है। एक महीने के बाद एमसीआई की टीम दोबारा कॉलेज का निरीक्षण करने आएगी। इस बार एमसीआई के मानकों पर पूरी तरह से कॉलेज खरा उतरेगा।
- डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता, प्राचार्य, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज
एलओपी मिली तो यह होगा फायदा
अगर दून मेडिकल कॉलेज को लैटर ऑफ परमीशन(एलओपी) मिल जाता है तो इससे सीधे 100 एमबीबीएस की सीटें मिलेंगी। इनमें से 85 सीटें राज्य कोटे की होंगी जो कि यूपीएमटी परीक्षा से भरी जाएंगी जबकि 15 सीटें ऑल इंडिया कोटे की होंगी जो कि एआईपीएमटी परीक्षा से भरी जाएंगी।
एमसीआई ने यह बताई कमियां
- हॉस्पिटल की ओपीडी बहुत कम जगह में थी। जगह कम होने से मरीज परेशान दिखे।
- कॉलेज में छात्रों के खेलने के लिए प्ले ग्राउंड नहीं है।
- लाइब्रेरी में एसी नहीं है और किताबों की संख्या काफी कम है।
- कॉलेज के लेक्चर थियेटर में फर्नीचर नहीं है।
- कॉलेज के लिए जरूरी कमेटियों का गठन नहीं हुआ है।
- फैकल्टी की कमी को निरीक्षण के दौरान तक पूरा नहीं किया गया।
- मेडिकल कॉलेज में फोटोग्राफी यूनिट नहीं है।
- कॉलेज में चिकित्सा अधीक्षक को स्वास्थ्य विभाग से डेपुटेशन पर लिया गया है। इसके लिए अलग चिकित्सा अधीक्षक होना चाहिए।
- एक खास नंबर की एक्सरे मशीन उपलब्ध नहीं है।
- लैब से जुड़े उपकरणों की जरूरत है।
मेडिकल कॉलेज जो पत्र आया है, उसमें से हमने कई काम पूरे कर लिए हैं। फैकल्टी सहित तमाम जरूरतें जल्द पूरी कर ली जाएंगी। हम जल्द से जल्द सभी कमियां दूर करने के बाद इसके प्रमाण एमसीआई को भेज देंगे। एमसीआई टीम ने बताया है कि हॉस्पिटल स्वास्थ्य विभाग के अधीन है जबकि हमने शासनादेश की कॉपी उपलब्ध कराई थी। हॉस्पिटल अब चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन है। इस बार एमसीआई की टीम मानकों के हिसाब से निश्चित तौर पर संतुष्ट होगी।
- डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा