बीबीएयू में अंग्रेजी के ज्यादा प्रयोग पर आपत्ति जताई गई है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने अंग्रेजी के बजाए हिंदी का ही अधिक से अधिक प्रयोग करने की सलाह दी है।
बीबीएयू को सख्त हिदायत दी गई है कि वह अंग्रेजी का कम से कम प्रयोग करे। अभी जो स्थिति है उसके अनुसार अंग्रेजी का अधिक प्रयोग किया जा रहा है।
बीबीएयू के विभागों व प्रमुख कार्यालयों में अंग्रेजी में ही अधिक पत्राचार हो रहा है।
मार्च 2014 में खत्म हुई तिमाही में की गई समीक्षा के आधार पर बीबीएयू प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वह हिंदी का प्रयोग करे।
राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) का प्रयोग यहां नहीं हो रहा है। बीती तिमाही में 1015 में से 653 कागज अंग्रेजी में जारी किए जाने पर हैरानी जताई गई है।
निदेशक (राजभाषा) राकेश शर्मा की ओर से बीबीएयू को भेजे गए पत्र में लिखा गया है कि मार्च 2014 में खत्म हुई तिमाही की समीक्षा के अनुसार 1015 कागज जो बीबीएयू ने जारी किए उनमें से 653 अंग्रेजी में थे।
इसके अलावा बीबीएयू के कार्यालय को हिंदी में प्राप्त 362 पत्रों में से उसे 59 का जवाब अंग्रेजी में दिया।
जबकि नियम के अनुसार उसे सभी पत्रों का जवाब हिंदी में ही देना था।
इसी तरह कार्यालय द्वारा इस तिमाही में कुल 1405 टिप्पणियां फाइलों पर लिखी गईं।
इसमें 960 टिप्पणियां अंग्रेजी में थीं। केवल 445 टिप्पणियां ही हिंदी में लिखी गईं।
इस तिमाही में न तो हिंदी में कार्यशाला का आयोजन किया गया न ही राजभाषा क्रियान्वयन समिति की कोई बैठक हुई।
मालूम हो कि बीबीएयू में स्टूडेंट्स की भी शिकायत रहती है कि यहां टीचर भी अधिकांश हिस्सा अंग्रेजी में ही पढ़ाते हैं।
अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से पत्र आने के बाद यूनिवर्सिटी में खलबली मची हुई है।
बीबीएयू प्रशासन ने सभी विभागों व कार्यालयों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि वह हिंदी में ही अधिक काम करें।