बेहतर बनने की कोई सीमा नहीं होती। यह एक सतत प्रक्रिया है। हमेशा अच्छे काम करते रहना चाहिए। यह गुरुमंत्र प्रख्यात वैज्ञानिक पदमभूषण डॉ. आरए माशेलकर ने मेधावियों को दिया।
वह गुरुवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के 56 वें दीक्षांत समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। एलयू ने उन्हें डीएससी की मानद उपाधि दी। कार्यक्रम में एमबीई की छात्रा रोमा को चांसलर गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
एलएलएम की छात्रा शिप्रा मिश्रा और एमबीए फाइनेंस की छात्रा शिवानी श्रीवास्तव को चांसलर सिल्वर मेडल मिला। चक्रवर्ती गोल्ड मेडल फॉर सर्विस एलएलबी ऑनर्स सातवें सेमेस्टर के छात्र अमिताभ श्रीवास्तव को दिया गया।
इसके अलावा बेस्ट एनसीसी कैटेड का वाइस चांसलर गोल्ड मेडल योगिता भट्ट को दिया गया। कार्यक्रम में 35 मेधावियों को पदक मिले। 183 मेडल में से 137 मेडल छात्राओं के खाते में गए हैं।
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, राज्यपाल बीएल जोशी, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और डीएससी की मानद उपाधि पाने वाले डॉ. आरए माशेलकर ने मेधावियों को सम्मानित किया।
एलयू के दीक्षांत समारोह में डीएससी की मानद उपाधि पाने वाले प्रख्यात वैज्ञानिक पदमभूषण डॉ. आरए माशेलकर अपनी मां अंजनी माशेलकर को याद कर भाव-विभोर हो गए।
उन्होंने बच्चों को अपने जीवन की कहानी सुनाते हुए कहा कि छह साल की उम्र में उनके पिता नहीं रहे। मां के साथ वे मुंबई आ गए। गरीबी में रहकर भी मां ने मेहनत कर उन्हें पढ़ाया और हमेशा आगे बढ़ने की सीख दी।
स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर पढ़ाई की। उन्होंने कहा कि इंटरमीडिएट के बाद सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किया लेकिन मां ने विरोध करते हुए कहा कि इससे तो जिंदगी आसान हो जाएगी और सीखना बंद कर दोगे।
पीजी और पीएचडी के बाद भी उन्होंने निरंतर उत्कृष्ट कार्य करने और रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ने की हिदायत दी। डॉ. माशेलकर ने कहा कि जब डीएससी में 25वीं मानद उपाधि मिली, तब मां ने संतुfष्ट जताई।
उन्होंने मेधावियों को प्रेरणा देते हुए कहा कि स्टूडेंट्स हमेशा बेहतर करने की कोशिश करें। बेहतर बनने की कोई सीमा नहीं होती। डॉ. माशेलकर ने अपने गुरु प्रो. एमएम शर्मा और प्रो. सीएनआर राव को भी याद किया।
उन्होंने कहा कि प्रो. एमएम शर्मा ने हमेशा नैतिकता का पाठ पढ़ाया। वहीं, भारत रत्न विजेता प्रो. सीएनआर राव ने जीवन में संभावनाएं तलाशने का रास्ता दिखलाया।
काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के पूर्व महानिदेशक डॉ. आरए माशेलकर ने सीएसआईआर का भी धन्यवाद ज्ञापित किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, शोध और इनोवेशन तीन महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। शिक्षा से ज्ञान का विस्तार, शोध से नया ज्ञान और इनोवेशन से भौतिक संपन्नता मिलती है।
कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसबी निमसे ने कहा कि करीब 90 प्रतिशत स्टूडेंट राज्य विश्वविद्यालयों में ही पढ़ते हैं। ऐसे में जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि अगर वैश्विक स्तर पर चैलेंज स्वीकार करना है तो सिलेबस अपडेट करना होगा और क्वालिटी रिसर्च पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों पर भी जिम्मेदारी है कि वह उत्कृष्ट शिक्षा दें और बेहतर रिसर्च करवाएं।
उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय कोर्स कॅरिकुलम और मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव करेगा। उन्होंने कहा कि ग्रास इनरोलमेंट रेशियो (जीईआर) को वर्ष 2020 तक 30 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है। ऐसे में हमें समाज के पिछड़े तबके के लोगों को उच्च शिक्षा से जोड़ने की कोशिश की जानी चाहिए।