एचपीयू की पहले से विवादों में रही शिक्षक भर्ती पर एक और संकट मंडराने के आसार बन गए हैं। 27 जनवरी को हुई विवि की कार्यकारी परिषद की बैठक में विवि ने गुपचुप तरीके से करीब डेढ़ साल पहले से शुरू की गई दो सौ शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया की समय सीमा छह माह और बढ़ा दी है, जिसे पहले भी छह महीने बढ़ाया गया था।
विवि के कुलसचिव डा. पंकज ललित ने इसकी पुष्टि की है। ईसी के इस फैसले के बाद अब शिक्षक भर्ती के इस विज्ञापन की समय सीमा को 8 सितंबर 2016 तक बढ़ाया है। भर्ती की समय सीमा बढ़ाने से इन दो वर्षों में नेट परीक्षा उर्त्तीण करने वाले न जाने कितने ही उम्मीदवार आवेदन करने से वंचित रह गए जाएंगे।
इसे यूजीसी और भर्ती नियमों की अनदेखी बताया जा रहा है। विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ शोध छात्र और छात्र संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। इस कारण मामला कोर्ट तक भी जा सकता है। जिससे भर्ती प्रक्रिया पर स्थायी रूप से ब्रैक भी लग सकती है।
ईसी ने 27 जनवरी को दी मंजूरी
विवि की कार्यकारी परिषद की 27 जनवरी को हुई बैठक में आइटम नंबर 26 और मद संख्या 26 में अंकित शिक्षक भर्ती की समय सीमा को और छह माह बढ़ाकर सितंबर 2016 तक करने को मंजूरी मिली।
अगस्त 2014 में विज्ञापित हुए पद
विश्वविद्यालय ने 2014 अगस्त माह में दो सौ शिक्षकों की भर्ती को विज्ञापन प्रकाशित किया था, 8 सितंबर 2014 तक आवेदन की अंतिम तिथि तय की गई थी। 8-9-2015 को भर्ती के लिए रखा समय पूरा हो गया। अब हाल ही में 27 फरवरी को एक बार फिर शिक्षक भर्ती की समय सीमा सीधे आठ सितंबर 2016 तक बढ़ा दी गई है।
छात्र संगठनों ने किया फैसले का विरोध
विश्वविद्यालय एसएफआई इकाई अध्यक्ष नोबल ठाकुर, एनएसयूआई इकाई अध्यक्ष हुक्म, सचिव सोहन पुंडीर, एबीवीपी के प्रांत मंत्री आशीष सिक्टा ने फैसले का विरोध किया है। दो बार समय सीमा बढ़ाने को उन्होंने पात्र नेट पास युवाओं के हाथ से शिक्षक बनने का मौका छीनने की साजिश करार दिया।
शिक्षक संघ ने बताया युवाओं से धोखा
शिक्षक संघ हपुटा के अध्यक्ष प्रो. मोहन झारटा, सचिव प्रो. रमेश चौहान ने ईसी के इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि यह इन दो वर्षों में पद के लिए पात्र युवाओं के साथ धोखा है, और कहीं न कहीं नियमों की अनदेखी है। इसे लेकर वे मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे।
उधर, शिक्षक संघ हपुटवा के अध्यक्ष प्रो. शशि कांत शर्मा और सचिव प्रो. देस राज शर्मा ने भी ईसी के इस फैसले को भर्ती नियमों के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि ईसी का यह फैसला वापस न लिया तो इसे राजभवन तक लेकर जाएंगे।