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8वीं के बाद लीजिए अब सीधे ग्रेजुएशन में दाखिला

Fri, 08 Nov 2013 01:56 AM IST
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
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उ.प्र विकलांग उद्धार डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी में सत्र 2014-15 से सेंटर फॉर साइन (सांकेतिक) लैंग्वेज स्ट्डीज में पढ़ाई शुरू हो जाएगी। इसमें दो कोर्स चलेंगे।
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पहले सत्र में बैचलर प्रिपरेटरी प्रोग्राम फॉर डेफ स्ट्डीज का एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स शुरू होगा।

इसमें वह मूक-बधिर स्टूडेंट जो किन्हीं कारणों से कक्षा-आठ व दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई नहीं कर पाए हैं वह इस सर्टिफिकेट कोर्स में दाखिला लेंगे।

पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्हीं स्टूडेंट को 2015-16 में शुरू होने वाले बैचलर ऑफ आर्ट्स इन एप्लाइड लैंग्वेजज में प्रवेश दिया जाएगा। यानि एक वर्ष का सर्टिफिकेट कोर्स पढ़ने के बाद यह स्टूडेंट सीधे स्नातक में प्रवेश पा जाएंगे।

यह निर्णय गुरुवार को डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइन लैंग्वेज एंड डेफ स्ट्डीज, यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल लंकाशायर यूनाइटेड किंगडम की टीम ने लिया।
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टीम दो दिवसीय दौरे पर यहां आई है। टीम ने विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज कुमार और अन्य अधिकारियों से इस सेंटर की स्थापना को जल्द से जल्द शुरू करने की सलाह दी।

अभी यह सर्टिफिकेट कोर्स अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाया जाएगा और विशेष स्थिति में छात्रों को हिंदी में भी सांकेतिक भाषा की पढ़ाई करवाई जाएगी। आगे इस कोर्स को दूसरी भारतीय भाषाओं और विदेशी भाषाओं में भी पढ़ाया जाएगा।

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइन लैंग्वेज एंड डेफ स्ट्डीज, यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल लंकाशायर (यूके) की डायरेक्टर प्रो. अलराइक जीशान ने कहा कि सांकेतिक भाषा को पढ़ाने के लिए इसकी अपनी एक अलग ग्रामर है।

ऐसे में जो स्टूडेंट इसे अंग्रेजी माध्यम से पढ़ेंगे उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्लेसमेंट मिलने में आसानी होगी। हिंदी का विकल्प इसलिए स्टूडेंट को देना जरूरी है क्योंकि उत्तर प्रदेश व उसके आसपास के राज्य हिंदी भाषी ही हैं।

इस सेंटर को चलाने के लिए अभी यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल लंकाशायर फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत एक्सपर्ट उपलब्ध करवाएगी और मूक-बधिरों की समस्याओं पर मिलकर शोध भी करेगी। दोनों यूनिवर्सिटी अभी से इस नए कोर्स का सिलेबस तैयार करने में जुट गई हैं।

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइन लैंग्वेज एंड डेफ स्ट्डीज, यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल लंकाशायर (यूके) के लेक्चरर डॉ. शिवाजी पाण्डा ने कहा कि हमें भारत की भौगोलिक दशाओं व समस्याओं को देखते हुए साइन लैंग्वेज (सांकेतिक भाषा) को तैयार करना होगा।

क्योंकि अमेरिका की साइन लैंग्वेज और यहां की साइन लैंग्वेज में अंतर होना स्वाभाविक है। डीन एकेडमिक्स प्रो. एपी तिवारी ने बताया कि लंकाशायर यूनिवर्सिटी की यह टीम अभी फरवरी 2014 में फिर यहां आएगी।

अगले सत्र से सेंटर फॉर साइन लैंग्वेज स्ट्डीज की शुरुआत होगी और पहले साल सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया जाएगा।

यहां से सांकेतिक भाषा पढ़ाने वाले मॉस्टर ट्रेनर भी तैयार होंगे। वहीं शुक्रवार को प्रो. अलराइक जीशान इंग्लिश लिटरेसी फॉर डेफ लर्नर्स पर अपना व्याख्यान देंगी।
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