लखनऊ यूनिवर्सिटी में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया की राह में आ रही अड़चनें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। विभागों से सीटों का ब्यौरा मांगे 20 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक विवि यह तय नहीं कर पाया है कि किस विषय में कितनी सीटें रिक्त हैं?
किस विषय में पीएचडी करानी है और किसमें नहीं? सूत्रों की मानें तो यह सारी समस्या कुछ ऐसे विषयों में प्रवेश से फंसी है जिनमें पिछले सत्र तक तो पीएचडी कराई जाती थी लेकिन इस साल उनका नाम सूची से बाहर है।
वहीं कुछ ऐसे विषयों को पीएचडी की सूची में शामिल कर लिया गया है जिनमें पीजी की पढ़ाई नहीं हो रही है। यह सूची पीएचडी के नए ऑर्डिनेंस के साथ कार्यपरिषद में अनुमोदित होने के बाद राजभवन भी भेजी जा चुकी है। ऐसे में अब विवि के सामने ये दिक्कत है कि सूची में बदलाव को फिर से अनुमति लेनी होगी।
सूत्रों की मानें तो पीएचडी ऑर्डिनेंस तैयार करते समय इस बात को लेकर चर्चा हुई थी कि उसके साथ विषयों की सूची न शामिल की जाए। केवल यही बिंदु लिखा रहे कि जिन विषयों में पीजी की रेग्युलर पढ़ाई होती है उनमें पीएचडी कराई जा सकती है।
उद्देश्य ये था कि विवि आवश्यकतानुसार जिन विषयों में पीजी की पढ़ाई शुरू या बंद करेगा उनके अनुसार पीएचडी की सूची भी अपडेट होती रहेगी।
इसके लिए बार-बार कार्यपरिषद या राजभवन की अनुमति नहीं चाहिए होगी। लेकिन बाद में पीएचडी के लिए विषयों की सूची में शामिल करके एलयू इसे अपडेट करने में अड़चनों का सामना कर रहा है।