दिल्ली विश्वविद्यालय इन दिनों गुरु-शिष्यों के चुनावों के कारण राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है। बीते कई दिनों से चली आ रही शिक्षक राजनीति के बाद अब छात्र राजनीति की गरमाहट महसूस की जाने लगी है।
शिक्षक डूटा चुनाव के लिए प्रचार अभियान में जुटे हैं। वहीं तमाम छात्र संगठन इन दिनों छात्रों के बीच जाकर समर्थन जुटा रहे हैं। वहीं कैंपस में जगह-जगह छात्र संगठनों के नामों के साथ भावी दावेदारों के नामों के पोस्टरों से दीवार पट चुकी है।
दिल्ली विश्वविद्यालय का नया सत्र शुरू होते ही सबसे पहले शिक्षकों की चुनावी गतिविधियां तेज हुईं। आगामी 27 अगस्त को दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ चुनाव (डूटा चुनाव) के चलते सभी चुनाव प्रचार में तेजी आ गई है।
शुक्रवार को उम्मीदवारों की ओर से नामांकन किए गए। जबकि, 22 अगस्त दोपहर 12 बजे तक उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकेंगे। मालूम हो कि शिक्षक संगठन एएडी ने संयुक्त रुप से डॉ संजय सिंह को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया है।
जबकि, डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट से अध्यक्ष पद के लिए डॉ नंदिता नारायण को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट ने वीरेंद्र सिंह नेगी को अध्यक्ष पद केलिए खड़ा किया है। संगठन अपने-अपने मुद्दों के साथ शिक्षकों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे हैं।
वहीं, छात्र संगठनों ने भी डूसू चुनावों को लेकर अपनी सरगर्मियां तेज कर दी हैं। एबीवीपी हो या एनएसयूआई या फिर सीवाईएसएस, आइसा या फिर इनसो व एसएफआई, सभी संगठन आजकल नए छात्रों तक पहुंच बना रहे हैं।
एनएसयूआई ने तो कैंपस के अनुसार अपने मुद्दे तैयार किए हैं। मसलन ईस्ट, वेस्ट, साउथ व नॉर्थ कैंपस। एनएसयूआई उपाध्यक्ष राजा कुमार का कहना है कि हर कैंपस के मुद्दे अलग-अलग हैं, लिहाजा उसी आधार पर छात्रों केबीच पहुंच बनाई जा रही है।
वहीं कैंपस में पोस्टरबाजी भी शुरू हो चुकी है। कैंपस में इन दिनों जगह-जगह छात्र नेताओं केनामों वाले पोस्टर लगे हुए हैं। कहा जाता है कि जिसकेजितने ज्यादा पोस्टर उसकी दावेदारी उतनी ही मजबूत हो जाएगी। बात चाहे जो भी हो, लेकिन इतना तय है कि पूरे कैंपस में इन दिनों राजनीति हावी है।