देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज में प्राचार्य को हटाने की मांग पर भूख हड़ताल कर रहे छह छात्र नेताओं की हालत अचानक बिगड़ गई। इन्हें दून अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इनका उपचार चल रहा है।
डीएवी के छात्र नेताओं ने धमकी दी है कि जल्द से जल्द उनकी मांग न मानी गई तो भूख हड़ताल पर बैठे बाकी 9 छात्र जल भी त्याग देंगे। डीएवी में प्राचार्य को हटाने के लिए 15 छात्र नेता तीन दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। मंगलवार सुबह दून अस्पताल के चिकित्सक डॉ. डीसी ध्यानी ने छात्र नेताओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
उन्होंने बताया कि छात्र नेता देवेंद्र बिष्ट को छोड़कर बाकी का स्वास्थ्य सही पाया गया। दोपहर बाद अचानक छात्रों की हालत बिगड़ने लगी। दो छात्र नेताओं सचिन नैथानी और अनुज को दून अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद शाम को करीब सात बजे चार और छात्र नेताओं शुभम सिमल्टी, आकाश गौड़, कपिल और संजय तोमर को भी दून अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
छात्रसंघ अध्यक्ष राकेश नेगी और महासचिव सचिन थपलियाल ने आरोप लगाया कि बीते तीन दिन में न कॉलेज प्रशासन, न प्रबंधन और न ही सरकार की ओर से कोई उनसे मिलने आया है। उन्होंने चेतावनी दी कि उनकी मांग न मानी गई तो भूख हड़ताल पर बैठे बाकी 9 छात्र नेता जल भी त्याग देंगे।
विवि प्रतिनिधियों ने दिया आंदोलन को समर्थन
गढ़वाल विवि छात्र महासंघ के अध्यक्ष भूपेंद्र नेगी के आह्वान पर मंगलवार को डीएवी कालेज में विभिन्न कॉलेजों के विवि प्रतिनिधि पहुंचे। सभी ने एक सुर में प्राचार्य के खिलाफ चल रहे आंदोलन को समर्थन दिया। भूपेंद्र ने कहा कि भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेताओं की कोई सुध लेने नहीं आ रहा है।
उन्होंने सीएम हरीश रावत से मांग की कि समस्या के समाधान के लिए कार्रवाई शुरू करें। इस मौके पर ऋषिकेश, डोईवाला, एसजीआरआर पीजी कॉलेज, विकासनगर डिग्री कॉलेज, एमकेपी डिग्री कॉलेज, डीबीएस कॉलेज, एनडब्ल्यूटी कॉलेज, डीएवी कालेज सहित कई कॉलेजों के विवि प्रतिनिधियों के साथ ही छात्रसंघ महासचिव सचिन थपलियाल, उपाध्यक्ष भावना, अंशुल चावला, आशीष रावत आदि मौजूद रहे।
प्राचार्य बोले, हर तरह की जांच को तैयार
उधर, डीएवी के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन मंगलवार को मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज किया। एक होटल में पत्रकारों से रूबरू होते हुए डीएवी के प्राचार्य डॉ. भसीन ने कहा कि कॉलेज में दो बार सरकार की ओर से ऑडिट कराया जा चुका है, जिसमें आपत्ति सामने नहीं आई।
कहा कि प्रबंधन की ओर से ऑडिट टीम आई थी, जिसकी सूचना छात्रों तक लीक होना भी हैरानी की बात है। अब भी अगर प्रबंधन या सरकार चाहे तो जिस एजेंसी से जांच करा सकती है, वह जांच के लिए तैयार हैं। साफ किया कि कई छात्र संगठनों ने उन पर एडमिशन का दबाव बनाया है।
कई छात्र नेता उनके घर तक पहुंचे। लेकिन उन्होंने हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत निर्धारित सीटों पर मेरिट के हिसाब से दाखिले किए हैं, जो छात्र संगठनों को हजम नहीं हो रहे हैं। उन्होंने सभी छात्र नेताओं को संदेश भेजकर छात्रहित में आंदोलन खत्म करने की अपील की। उन्होंने कॉलेज के बाहर के तत्वों से कालेज में न आने की भी अपील की।
हो रहा छात्रों को भारी नुकसान
पहली बार गढ़वाल विवि ने ग्रेजुएशन में भी सेमेस्टर सिस्टम लागू किया है। इसके तहत 28 अक्तूबर से सेशनल एग्जाम होने हैं, लेकिन कॉलेज बंद होने से छात्रों की कक्षाएं नहीं चल पा रही हैं। इससे इन छात्रों को नुकसान हो सकता है। प्राचार्य ने बताया कि 27, 28 और 29 अक्तूबर को कॉलेज के 40 शिक्षकों के कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत इंटरव्यू होने हैं।
अगर इस वजह से वह लटक गए तो शिक्षकों को भारी नुकसान होगा। यह भी बताया कि 30 अक्तूबर तक ऑनलाइन स्कॉलरशिप के लिए आवेदन जरूरी है, लेकिन कार्यालय बंद होने से प्रक्रिया लटकी हुई है। इससे एससी और एसटी के छात्रों को नुकसान हो सकता है। इस लिहाज से उन्होंने कालेज खोलने की अपील की।
आंदोलन के समर्थन में दो बड़े नेताओं, कई शिक्षकों के होने की चर्चाएं
डीएवी पीजी कॉलेज में चल रहे प्राचार्य हटाओ आंदोलन पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कहा जा रहा है कि इस आंदोलन को समर्थन करने वालों में दो बड़े नेता और कॉलेज के कई शिक्षक भी शामिल हैं।
चर्चा है कि कॉलेज के विभिन्न राजनीतिक संगठनों से जुड़े शिक्षक आंदोलन में आग में घी का काम कर रहे हैं। आते-जाते वह छात्रों को आंदोलन चलाए रखने के प्रति प्रोत्साहित कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, आंदोलन की शुरुआत भी कॉलेज के एक शिक्षक की तरफ से कराई गई है।