डीएवी पीजी कालेज में अनुमन्य सीटों से अधिक पर दाखिले को लेकर भले ही लंबी खींचतान चली हो, लेकिन सचाई यह है कि नियम तोड़ने में खुद कालेज प्रशासन का ही हाथ रहा। गढ़वाल विवि ने वर्ष 1998 से कालेज में सीटें नहीं बढ़ाईं। इसके बावजूद कालेज प्रशासन हर साल मनमर्जी से दाखिले देता रहा। हर बार गले की फांस बनते ही मामला विवि की ओर टरका दिया जाता।
परंपरा बन गई
विवि ने 1998 में कालेज के लिए सीटों की संख्या 12500 तय कर दी थी, लेकिन तब कालेज प्रशासन ने अपने स्तर पर ही दाखिले दे दिए। इसके बाद तो साल दर साल यह परंपरा सी बन गई। आज यह संख्या तय सीटों से बीस हजार अधिक यानी 32000 हो चुकी है। हालांकि, छात्रों के भविष्य को देखते हुए विवि ने हर बार सख्ती का रवैया टाल दिया, लेकिन इससे कालेज प्रशासन लापरवाह होता गया। अब विवि अनुमन्य सीटों पर ही दाखिले
की बात कह रहा है। छात्रनेता भले कहते हों कि विवि सीटें घटा रहा है, लेकिन सच यह है कि विवि ने सीटें कभी बढ़ाई ही नहीं थीं। गढ़वाल विवि के कुलसचिव डा. पीएस राणा ने बताया कि सीटों को लेकर कालेज और सरकार के बीच वार्ता चल रही है। 32 हजार दाखिलों के लिए विवि जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि कालेज को समय रहते अनुमन्य संख्या पर काबू पाना चाहिए।
3000 प्रॉस्पेक्टस बिके
डीएवी कालेज में तीसरे दिन मंगलवार को 3000 प्रॉस्पेक्टस बिके। अब तक कालेज से बिके प्रॉस्पेक्टस की संख्या 13500 हो चुकी है। बुधवार को भी प्रॉस्पेक्टस बिक्री जारी रहेगी। एक अगस्त से कालेज में नए सत्र के दाखिले शुरू होने जा रहे हैं।
प्रमाणपत्र नहीं तो भरो पूरी फीस
डीएवी कालेज में आरक्षित वर्ग (एससी और एसटी) के छात्रों को तहसीलदार या एसडीएम की ओर से जारी प्रमाणपत्र न लाने पर फीस में छूट नहीं मिलेगी। कालेज प्राचार्य डा. देवेंद्र भसीन ने बताया कि समाज कल्याण विभाग से इस बाबत पत्र मिल गया है। जो छात्र बाद में अपना आय प्रमाणपत्र देंगे, उन्हें अतिरिक्त फीस लौटाई जाएगी। बता दें कि अब तक जिला पंचायत या विधायक के बनाए प्रमाणपत्र से एडमिशन के वक्त ही एससी और एसटी छात्रों से कम फीस ली जाती थी।
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