राजधानी देहरादून से सटे प्राथमिक विद्यालय जीवनगढ़ में इन दिनों तीन कक्षों में ही पांच कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि विद्यालय के पास कक्षों का अभाव है लेकिन मेंटीनेंस न होने से दो कक्ष जर्जर हाल में हैं।
इन जर्जर कक्षों में छात्र बैठने और शिक्षक पढ़ाने से डर रहे हैं। हाल ही में विद्यालय में विधायक निधि से पक्के आंगन का निर्माण किया गया है, लेकिन जर्जर कमरों की तरफ किसी की नजर-ए-इनायत नहीं हुई।
1967 में हुआ निर्माण
मजबूरी में दो कक्षाओं का संचालन बाहर खुले में हो रहा है। आसमान में बादल होने पर छात्रों को ठिठुरते हुए पढ़ना पड़ता है। वर्ष 1967 में विद्यालय भवन का निर्माण किया गया। इसके बाद से विभाग ने स्कूल भवन की सुध नहीं ली। वर्तमान में स्कूल में 125 छात्र अध्ययनरत हैं।
प्रधानाध्यापक आफताब आलम का कहना है कि जर्जर कमरों का लगातार प्लास्टर गिर रहा है। ऐसे में बाहर खुले में कक्षाओं का संचालन मजबूरी बन गया है। सामाजिक कार्यकर्ता पिन्नी शर्मा का कहना है कि भवन की मरम्मत के लिए कई बार विभाग को पत्र लिखा जा चुका है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।