एसएसए-रमसा नॉन टीचिंग मुलाजिमों के आंदोलन से शिक्षा विभाग का काम पूरी तरह ठप हो गया है। शिक्षा विभाग से लेकर स्कूलों तक हड़ताल का असर साफ दिखाई पड़ रहा है।
संघर्ष इसी तरह जारी रहा, तो दिसंबर माह में शिक्षा विभाग के मुलाजिमों को वेतन के लिए परेशानी उठानी पड़ सकती है। इसके अलावा स्कूलों में चल रहे विकास कार्यों भी प्रभावित होंगे।
मंगलवार को मुलाजिमों की कलम छोड़ हड़ताल 37वें एवं स्थाई धरना 9वें दिन में प्रवेश कर गया। जबकि भूख हड़ताल के दूसरे दिन महिला मुलाजिम भूख हड़ताल पर बैठीं।
इनमें जिला मानसा की संदीप कौर, कुमारी रीनू व हरीश सिंह शामिल थे। यूनियन ने साफ किया है कि जब तक वेतन बढ़ोतरी की मांग पूरी नहीं होती है। तब तक मुलाजिम दफ्तरों में नहीं जाएंगे।
यूनियन के सूबा वाइस प्रधान गुरमीत सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा मुलाजिमों की मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। हड़ताल का असर मुख्य दफ्तर से लेकर स्कूलों तक के काम पर पड़ रहा है। उन्होंने माना कि हड़ताल के चलते अध्यापकों के वेतन व स्कूल स्तर दी जाने वाली ग्रांट भी रुक गईं हैं।
साथ ही केंद्र से मिलने वाली राशि भी दांव पर लग गई है। उन्होंने कहा कि सरकार दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने के लिए दिल्ली रवाना हो गई है। जबकि मुलाजिमों की मांगें सुनने को कोई नहीं है।
उन्होंने कहा कि मुलाजिमों के संघर्ष में अब आम लोग भी शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा जत्थेबंदियां भी उनके समर्थन में आई हैं। इनमें पुडा तालमेल संघर्ष कमेटी, एलिमेंट्री टीचर यूनियन, जीटीयू व पंजाब सर्बाडिनेट सर्विसेज फेडरेशन शामिल हैं।