देश में सभी को रोजगार देने के लिए हर साल 10 लाख रोजगार की जरूरत होगी। इसके लिए आईआईटी जैसे संस्थानों से निकलने वाले युवा वर्ग को उद्यमशीलता की ओर कदम बढ़ाने की जरूरत होगी।
यह बात साइंट लिमिटेड के संस्थापक व एग्जिक्यूटिव चेयरमैन एवं नेस्कॉम के चेयरमैन बीवीआर मोहनरेड्डी ने शनिवार को आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कही। दीक्षांत समारोह में कुल 2162 छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की गई। डिग्री पाते ही समूचा दीक्षांत भवन उल्लास के साथ झूम उठा।
शनिवार को दीक्षांत भवन में आयोजित आईआईटी के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मोहन रेड्डी ने युवाओं को उद्यमशीलता की ओर कदम बढ़ाने पर जोर देते हुए अपनी कामयाबी के सफर से अवगत कराया। आईआईटी कानपुर और इसके बाद मिसिगन यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट में डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने 1991 में साइंट कंपनी खड़ी की।
जिसमें आज विश्वभर में 38 जगहों पर साढ़े बाहर हजार से अधिक लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। उन्होंने कामयाब उद्यमी बनने के लिए लक्ष्य के प्रति सही दृष्टिकोण, सपनों को हकीकत में बदलने की कला, सही अवसर का लाभ उठाने, रिस्क का आकलन करने और नाकामयाब होने पर कमियों को दूर करने, जवाबदेह टीम को खड़ा करने, कंपनी के मूल्यों, व्यवहार और संस्कृति को स्थापित करने को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि यहां से डिग्री मिलने का मतलब यह नहीं है कि अब सीखने को कुछ नहीं रहा। बल्कि अब उन्हें धरातल पर और अधिक सीखने की जरूरत पड़ेगी। दीक्षांत समारोह में कुल 2162 छात्रों को उपाधि प्रदान की गई। जिसमें 980 बीटेक, बी आर्क और इंटीग्रेटिड डुअल डिग्री के छात्र, 945 एमटेक, एम आर्क, एमएससी, एमसीए, एमटेक के छात्र और 237 पीएचडी के छात्र शामिल रहे।
इससे पूर्व संस्थान के निदेशक के प्रो. प्रदीप्त बनर्जी ने संस्थान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। बीओजी चेयरमैन प्रो. अशोक मिश्रा ने संस्थान में संचालित हो रहे महत्वपूर्ण कार्यों की जानकारी दी। समारोह में छात्र संकेत वैभव मेहता अभिनव राजवंशी राहुल अधिकारी और सौम्या गुप्ता को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। इसके अलावा चार लोगों को उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए रिसर्च अवार्ड प्रदान किए गए।