पहली क्लास से पंजाबी और तीसरी कक्षा से हिंदी न पढ़ाने वाले स्कूलों पर अब गाज गिरेगी। शिक्षामंत्री डॉ. दलजीत चीमा ने भाषा एक्ट को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए हैं। इस पर अधिकारियों से बीस नवंबर तक रिपोर्ट तलब की है।
डॉ. चीमा ने हिदायत दी कि सभी सरकारी व निजी स्कूल, चाहे वे पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई या आईसीएसई से संबंधित हैं, में भाषा एक्ट लागू कराया जाए। पहली से पंजाबी और तीसरी से हिंदी पढ़ाना यकीनी बनाया जाए। जिन स्कूलों में एक्ट का उल्लंघन पाया गया, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. चीमा ने बताया कि उनके ध्यान में आया है कि कई स्कूलों ने एक्ट लागू नहीं किया है। नवंबर के पहले सप्ताह को पंजाबी सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर भाषा एक्ट को सख्ती से लागू किया जाएगा। एक्ट के तहत स्कूलों को पहली क्लास से पंजाबी और तीसरी से हिंदी पढ़ाना जरूरी है।
उल्लंघन करने वाले स्कूल पर पहले महीने 25 हजार रुपये जुर्माना, दूसरे महीने पचास हजार रुपये और तीसरे महीने एक लाख रुपये जुर्माना किया जाएगा। एक साल तक एक्ट का उल्लंघन करने वाले स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। डॉ. चीमा ने कहा कि एक्ट पर जिला शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट बीस नवंबर तक आ जाएगी। जिसके बाद मुख्यालय की टीमें स्कूलों की चेकिंग करेंगी।
पंजाबी राज्य भाषा है और हिंदी राष्ट्र भाषा, इनको नजरअंदाज करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई स्कूल अंग्रेजी पर जोर देता है तो विभाग को कोई एतराज नहीं है, पर हिंदी और पंजाबी को नजरअंदाज नहीं करने दिया जाएगा। सभी डीईओ को निर्देश दिए गए हैं कि जिले में एक्ट लागू करने की जिम्मेदारी उनकी है।