लविवि के शिक्षकों के पैनल के कारण संबद्ध कॉलेजों की मान्यता व मानकों पर फाइनल रिपोर्ट लगाने में अब देरी नहीं होगी।
एलयू की ओर से बनाए गए नए नियम के अनुसार अब कॉलेजों में निरीक्षण के लिए एलयू के शिक्षकों के पैनल के साथ ही कॉलेज के शिक्षक भी शामिल होंगे, सेवानिवृत्त शिक्षक भी पैनल में शामिल किए जाएंगे, जो दूसरे कॉलेजों में जाकर निरीक्षण करेंगे और रिपोर्ट देंगे।
इससे समय से सभी कॉलेजों में कई विषयों को मान्यता मिल जाएगी। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस बी निमसे ने बताया कि इस नए नियम से कॉलेजों को लाभ मिलेगा और मान्यता मिले बगैर प्रवेश हो जाने के खतरे से भी स्टूडेंट्स बचेंगे।
मालूम हो कि अब तक कॉलेजों में मानकों के निरीक्षण के लिए एलयू के विभाग के ही शिक्षकों का पैनल जाता था। सभी शिक्षकों की उपलब्धता एक साथ न होने के कारण कई कॉलेजों में विषयों को मान्यता मिलने में देरी होती थी।
वह बगैर मान्यता के बच्चों का दाखिला भी ले लेते थे। बाद में अगर निरीक्षण हुआ और मान्यता रद्द कर दी गई तो इसका सबसे ज्यादा खामियाज छात्र भुगतते थे।
लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों की मान्यता या मानक संबंधी मामलों की स्थिति जांचने के लिए विवि के संबंधित विभाग के शिक्षकों का पैनल निरीक्षण के लिए जाता है।
इसके बाद पैनल अपनी रिपोर्र्ट लगाता है, जिसके आधार पर ही कॉलेज की मान्यता या फिर मानक संबंधी मामलों पर तुरंत फैसला लिया जाता है।
इसमें समस्या तब आती है, जब मान्यता विस्तार के लिए लविवि के पास कॉलेज आवेदन करते हैं लेकिन समय पर शिक्षकों का पैनल निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचता।
विश्वविद्यालय में शिक्षकों की सीमित संख्या होने के कारण पैनल जाने में देरी होती है। हर साल ऐसा होता है कि एडमिशन की तिथि बीतने के बावजूद जुलाई-अगस्त तक शिक्षकों का पैनल कॉलेज में जांच के लिए नहीं आता, जिन कॉलेजों में कुछ विषयों को मान्यता नहीं मिली है।
उनमें देरी होती है और कॉलेज बगैर मान्यता के ही दाखिले लेने लगते हैं। अगर बाद में पैनल ने निरीक्षण किया और मान्यता रद्द हो गई तो इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है।
स्टूडेंट्स का भविष्य दांव पर न लगे, इसके लिए लविवि ने नई व्यवस्थ लागू की है जिसमें एलयू के विभागवार शिक्षकों के साथ ही कॉलेजों के शिक्षक भी पैनल में शामिल होंगे।
अगर दोनों जगहों पर शिक्षक समय पर उपलब्ध नहीं होते है तो सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। इससे अब मान्यता व मानक संबंधी मामलों में देरी नहीं होगी और शिक्षकों के पैनल के कारण कॉलेज की मान्यता और मानक पर भी सवाल खड़े नहीं होंगे।
नहीं पहुंचा विवि का पैनल
लखनऊ विश्वविद्यालय से सहयुक्त 41 कॉलेजों ने 30 अक्तूबर, 2013 की निर्धारित अवधि में अपने मानक पूरे नहीं किए। लविवि ने कार्रवाई की बात कही तो हकीकत कुछ और ही नजर आई।
इनमें से दो दर्जन से ज्यादा कॉलेज ऐसे थे, जिन्होंने मानक पूरे करने के बाद लविवि को निरीक्षण केे लिए पत्र लिखा लेकिन लविवि का पैनल नहीं पहुंचा। ऐसे में फाइनल रिपोर्ट नहीं बन सकी।