केयू से संबंधित कॉलेजों के शिक्षक अब पीएचडी के लिए शोध निर्देशक बन सकेंगे। यह फैसला मंगलवार देर शाम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डीडीएस संधू की अध्यक्षता में आरके सदन में हुई अकादमिक काउंसिल की बैठक में लिया गया।
इस निर्णय के बाद कॉलेजों में शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों के लिए पीएचडी कराने का रास्ता साफ हो गया है। जो शिक्षक विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित शर्तों को पूरा करेंगे, वे अब पीएचडी के लिए शोध निर्देशक बन सकेंगे। इस फैसले से विद्यार्थियों को काफी फायदा होगा, जो गाइडेंस न मिलने के कारण पीएचडी करने से वंचित रह जाते थे।
इसके साथ ही केयू के कुछ विभागों में डी-लिट प्रोग्राम शुरू करने को भी अकादमिक काउंसिल ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी की सिफारिशों के बाद ही कुछ पाठ्यक्रमों में डी-लिट प्रोग्राम शुरू किया जा सकेगा।
डॉ. संधू ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य शैक्षणिक कार्यक्रमों की गुणवत्ता को बढ़ाना है, इसके लिए कई विभागों में इस सत्र से नए पाठ्यक्रम लागू करने की अनुमति प्रदान की गई है। केयू प्रवक्ता के अनुसार बैठक में शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित 15 से अधिक मुद्दों निर्णय लिए गए। बैठक में एमटेक कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए नियमाें में बदलाव, बीकॉम आनर्स के नए ओडिनेंस, बीबीए तृतीय सेमेस्टर में लेटरल एंट्री के तहत दाखिले के नियमों में बदलाव को अनुमति प्रदान की गई है।
बैठक में बीएससी केमिस्ट्री, बीएससी इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री, एमएससी इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री के पहले तथा चतुर्थ सेमेस्टर के पाठ्यक्रमोें को बार्ड ऑफ स्टडीज की अनुशंसा को बैठक में रखा गया और अनुमति प्रदान की गई।
इसके साथ ही बीसीए, एमसीए, एमटेक, एमएससी गणित, एमएससी इलेक्ट्रानिक्स साइंस, एमएससी स्टैटिक्स, एमए संस्कृत, बीएफए, एमएफए, एमए साउथ एशियन स्टडीज, एमफिल इतिहास, सर्टिफिकेट कोर्स इन उर्दू, एमए अर्थशास्त्र, एमए बिजनेस इक्नोमिक्स, एमलिब तथा एमए समाज शास्त्र, एमए जनसंचार, एमएससी जन संचार, बीएससी ग्राफिक्स एनीमेशन, बीएससी मल्टीमीडिया, बीटेक प्रिंटिंग ग्राफिक्स एवं पैकेजिंग के पाठ्यक्रमों को भी एकेडमिक काउंसिल की अनुमति प्रदान की गई है।