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कालेज बना नहीं, सीटें आवंटित

Fri, 26 Jul 2013 09:47 AM IST
आफताब अजमत
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प्रदेश सरकार की एक घोषणा इंजीनियरिंग में सपना संजो रहे 300 युवाओं के लिए मुश्किल पैदा करने वाली साबित हो रही है।
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सरकार ने गोपेश्वर में इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की घोषणा तो कर दी लेकिन अभी तक कालेज का कुछ पता नहीं। न सरकार ने पूरी जमीन दी और न ही कोई कैंपस की व्यवस्था हो पाई है। जिन 300 छात्रों को इस कागजी कालेज में दाखिला दिया जाएगा, उनके रहने का भी कोई इंतजाम नहीं है।

प्रदेश में उच्च और तकनीकी शिक्षा को लेकर लापरवाही चरम पर है। प्रदेश सरकार ने गत वर्ष गोपेश्वर में आईटी कालेज खोलने की घोषणा की थी। इस कालेज को यूटीयू के संघटक कालेज के तौर पर चलाने के निर्देश दिए गए। इसके बाद सरकार अपनी घोषणा को भूल गई। नए सत्र आया तो विवि ने कालेज में पांच ब्रांच की 300 बीटेक सीटें दे दी। प्रथम चरण की बीटेक काउंसिलिंग शुरू हुई तो करीब 288 सीटें आवंटित भी कर दी गई हैं।
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कालेज का सही एड्रेस नहीं मालूम
हालांकि, इन छात्रों को नहीं मालूम कि उनके कालेज का सही एड्रेस क्या है, बिल्डिंग कैसी है, इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा है, पढ़ाने वाले कौन है। अगर यूटीयू के संघटक कालेज में ही ऐसा होगा, तो निजी कालेजों की मनमानी पर लगाम लगाने की बात भी बेमानी होगी। विवि कुलपति के मुताबिक उन्हें फिलहाल दो हेक्टेयर जमीन मिल गई है, जिस पर कंस्ट्रक्शन शुरू हो चुका है।

हालांकि, महज दो माह में यह इमारत पढ़ने लायक बन जाएगी, इस पर संशय की स्थिति है। तकनीकी विवि ने हालांकि गोपेश्वर कालेज के लिए खासतौर से विलंब से सत्र शुरू करने और प्रवेश प्रक्रिया यूटीयू के सुद्धोवाला स्थित परिसर में पूरी करने की सुविधा तो दे दी है लेकिन सवाल यह है कि आखिर कालेज के लिए इतने कम समय में काबिल फैकल्टी कहां से आएगी। नियम के मुताबिक कालेज बनने और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप होने के बाद ही उसमें दाखिले लिए जाते हैं।

संघटक कालेजों का बुरा हाल
केवल आईटी गोपेश्वर कालेज ही नहीं कई और कालेज सरकार की सुस्ती और लापरवाही का शिकार हैं। प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं के लिए विशेषतौर पर इंजीनियरिंग कालेज की घोषणा की गई थी। डब्ल्यूआईटी के नाम से यूटीयू ने इस कालेज को गत वर्ष ही संचालित कर दिया था, लेकिन कालेज में भी अभी तक कोई बिल्डिंग नहीं है। हाल यह है कि विवि के नए परिसर में स्थिति एडमिन हॉल में यह कालेज संचालित किया जा रहा है।
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पिथौरागढ़ स्थित एसआईटी कालेज में भी फैकल्टी की भारी कमी है। कालेज में अब संविदा शिक्षकों को रखने की तैयारी चल रही है। हमें सरकार की ओर से दो हेक्टेयर जमीन दी जा चुकी है। कंस्ट्रक्शन हाल ही में शुरू हुआ है। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए हमारी टीम गोपेश्वर गई है। फिलहाल हमारे पास दो माह का वक्त है, इसलिए आसानी से नई बिल्डिंग में पढ़ाई शुरू हो जाएगी। छात्रों के रहने की फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
- प्रो. डीएस चौहान, कुलपति, यूटीयू

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