चंडीगढ़ पुलिस में कांस्टेबल की बेटी प्रीति यादव ने 12वीं में ही सेक्टर-32 स्थित आईएएस स्टडी सर्कल से आईएएस की कोचिंग शुरू कर दी। पिछले साल ही यूआईईटी की स्टूडेंट दीक्षा ने भी स्कूल स्तर से ही आईएएस की तैयारी शुरू कर दी है।
सेक्टर-37 स्थित एसएनएम आईएएस स्टडी सेंटर में पढ़ रही नवनीत और बसारत स्कूल लेवल से ही आईएएस की तैयारी कर रहे हैं। कोचिंग संचालक मनमीत ने बताया कि उनके पास 15 के करीब स्कूल स्टूडेंट आईएएस के स्पेशल बैच में तैयारी कर रहे हैं। स्टूडेंट्स का 15 दिन या महीने में टेस्ट होता है।
इंस्टीट्यूट स्टडी मैटीरियल और गाइडेंस देता है। सेक्टर-25 स्थित अभिमन्यु आईएएस स्टडी सर्कल के वाइस प्रेसिडेंट राज मल्होत्रा ने बताया कि 12वीं के करीब 20 स्टूडेंट सिविल सर्विसेज के बैच में शामिल हैं।
4 हजार कर रहे आईएएस की तैयारी
चंडीगढ़ में करीब 10 कोचिंग इंस्टीट्यूट और अन्य कोचिंग एक्सपर्ट से हर साल 4 से 5 हजार युवा सिविल सर्विसेज की कोचिंग लेते हैं। ट्राइसिटी ही नहीं साथ लगते राज्यों से भी स्टूडेंट दिल्ली की तुलना में अब चंडीगढ़ को तव्वजो देने लगे हैं।
आईएएस कोचिंग एक्सपर्ट प्रो.अनिल कुमार के अनुसार शहर आईएएस की तैयारी करने वालों के लिए एकदम उपयुक्त है। फीस के साथ ही यहां पर पढ़ाई का बेहतर माहौल और सिक्योरिटी भी काफी अच्छी है।
कोचिंग फीस 60 हजार से लाख तक
एक्सपर्ट के अनुसार आईएएस की तैयारी के लिए 6 महीने से 1 साल का समय काफी है। चंडीगढ़ के कोचिंग इंस्टीट्यूट 60 हजार से 1 लाख तक फीस लेते हैं। 12वीं स्तर के विद्यार्थियों के लिए स्पेशल कोर्स होते हैं, जिनकी फीस 10 से 15 हजार रखी जाती है।
ग्रेजुएशन के बाद दे सकते हैं सिविल सर्विसेज की परीक्षा
देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सर्विसेज में ग्रेजुएट स्टूडेंट अपीयर हो सकते हैं। यूपीएससी के ताजा संशोधन में जनरल कैटेगरी में 32 साल की उम्र तक 6 चांस मिल सकते हैं।
बदलते ट्रेंड में अब मेडिकल और इंजीनियरिंग बेकग्राउंड के स्टूडेंट अधिक सफल हो रहे हैं। सीसेट पैटर्न में अभ्यर्थी की ओवर ऑल डेवलपमेंट और नॉलेज को परखा जाता है।
प्रो.अनिल कुमार द्वारा आईएएस तैयारी के उपयोगी टिप्स
- 11वीं के बाद ही तैयारी शुरू कर दें।
- सब्जेक्ट ही नहीं व्यवहारिक नॉलेज भी जरुरी है।
- स्टूडेंट खुद में रीडिंग हैबिट पैदा करें।
- तैयारी की शुरूआत से ही खुद के नोट्स बनाना शुरू करें।
- टीवी पर डिस्कशन और अंग्रेजी न्यूज चैनल रूटीन में देखें।
- बच्चों में ग्रुप डिस्कशन की हैबिट डालें।
- सब्जेक्ट को समझने की कोशिश करें।