लखनऊ विश्वविद्यालय को विश्व के सर्वोच्च विश्वविद्यालयों में शुमार करने की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की उम्मीदों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की कमजोरियां हावी हैं।
विश्वविद्यालय को ढांचागत विकास के लिए 11वीं योजना के तहत 19 करोड़ रुपये मिले थे जिसमें से वह केवल आठ करोड़ ही खर्च कर पाया।
इसका सीधा असर 12वीं योजना के बजट आवंटन पर पड़ा और इस बार केवल 16 करोड़ रुपये ही विवि को मिल पाए। इधर, विश्वविद्यालय की दशा सुधारने के लिए 100 करोड़ की जरूरत है।
‘विजन 2020’ को लेकर चल रहे कुलपति डॉ. एसबी निमसे ने शनिवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से 50 करोड़ की सहायता देने का आग्रह किया है। कुलपति ने उम्मीद जताई है कि वह इतनी ही राशि पूर्व छात्रों से जुटा लेंगे।
लविवि में सुविधाओं की कमी की वजह से ही छह साल बाद लविवि का राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से मूल्यांकन कराया जाएगा। नैक ग्रेडिंग वर्ष 2007 में ही करवाई जानी थी लेकिन अब यह इस वर्ष अक्टूबर में करवाई जाएगी।
प्रशासन ए-ग्रेड पाने की उम्मीद में है। लविवि को टॉप यूनिवर्सिटी में लाने के लिए मूलभूत सुविधाएं देने के साथ-साथ विदेशी विश्वविद्यालयों से संपर्क कर नए कोर्स चलाना, स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम चलाना, क्वालिटी टीचिंग, अच्छा शोध और शोध का पेटेंट कराना भी शामिल है।