मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि केवल वही पुस्तकें स्कूलों में खरीदी जानी चाहिए, जिनमें बच्चों की रुचि की सामग्री हो। ऐसे में स्कूल तय करें कि वे ऐसी किताबों को खरीदें जिनसे बच्चों को सही ज्ञान मिले। लाइब्रेरी में बच्चों की रुचि बढ़ाई जाए और उन्हें यहां समय बिताने के लिए भी प्रेरित किया जाना चाहिए।
वीरभद्र ने यह बात मंगलवार को राज्य भाषा, कला एवं संस्कृति अकादमी की कार्यकारी परिषद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि अकादमी द्वारा खरीदी जाने वाली पुस्तकों में पहाड़ी भाषा में लघु कहानियां और कविताएं शामिल की जानी चाहिए। किताबें लोगों की रुचि के अनुरूप बहुविषययी होनी चाहिए और इनमें केवल शोध लेख ही नहीं होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2006 और 2007 से 2012 तक के लंबित साहित्य अकादमी पुरस्कारों को जून 2015 में एकमुश्त दिया जाए। उन्होंने 2012-13 से दिए जाने वाले पुरस्कारों की प्रक्रिया में संशोधन के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2006 के सभी पुरस्कारों के लिए लेखकों का चयन पहले किया जा चुका है। वर्ष 2007 से 2012 की अवधि के पुरस्कार नामांकन के आमंत्रण और छंटनी के बाद एक साथ दिए जाएंगे। वीरभद्र ने अकादमी से पुरस्कृत और हिमाचली लेखकों की पुस्तकों को 25 हजार रुपये की दर से खरीदने और हिमाचली लेखकों की अन्य पुस्तकों को बजट की घोषणा के अनुरूप 15 हजार रुपये की दर से खरीदने के निर्देश दिए।
वीरभद्र ने पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2002 में बंद किए गए ‘शिखर सम्मान’ को शुरू करने के भी निर्देश दिए। वीरभद्र सिंह ने वर्तमान में निजी आवास में चल रहे अकादमी भवन के लिए उपयुक्त भूमि या पर्याप्त स्थान की संभावनाओं का पता लगाने को कहा। इस अवसर पर लोक संस्कृति संरक्षण संघ राजगढ़ के अध्यक्ष विद्यानंद सरैक ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 11 हजार रुपये का चेक भेंट किया।