पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इस बार 10वीं और 12वीं की परीक्षा में पेपर लीक होने से बचाने और रिजल्ट जल्द घोषित करने के लिए खास इंतजाम तो किए थे, लेकिन ऐन वक्त पर बैंकों ने हाथ खड़े कर दिए।
इसके चलते बोर्ड ने पहले 12वीं और फिर 10वीं की परीक्षा कराने का फैसला लिया है। बैंकों ने दोनों कक्षाओं के प्रश्न पत्रों के भारी भरकम बंडल अपने यहां सुरक्षित रखने में स्थान की कमी का हवाला देते हुए बोर्ड से एक बार में एक ही कक्षा के प्रश्नपत्र रखने की बात कही है।
लिहाजा बोर्ड ने दसवीं की परीक्षाएं पंद्रह दिन आगे बढ़ाने का फैसला लिया है। राज्य में 10 मार्च से होने वाले वाले दसवीं की परीक्षाएं अब बारहवीं की परीक्षा के बाद 25 मार्च से शुरू होंगी। 12वीं की परीक्षाएं 22 मार्च को सम्पन्न हो जाएंगी।
बोर्ड ने परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक होने की घटनाएं रोकने के लिए भी पहली बार विशेष व्यवस्था की थी। इसके तहत प्रश्न पत्र बैंकों की शाखाओं में पहुंचाए जा रहे हैं जिन्हें पेपर शुरू होने से आधा घंटा पहले संबंधित स्टाफ को बैंकों से हासिल करना है।
इसके लिए बोर्ड ने तीन बैंकों एचडीएफसी, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया केसाथ समझौता किया है। इनकी संबंधित शाखाएं पेपर वाले दिन सुबह जल्दी खुलेंगी।
बोर्ड ने फैसला लिया कि बारहवीं की परीक्षा के बाद ही दसवीं की परीक्षा कराई जाए। इससे बैंकों में एक बार में एक कक्षा के प्रश्नपत्र रखने की व्यवस्था ही करनी होगी, जिसके लिए बैंक तैयार हैं।
स्टाफ की कमी के कारण लिया फैसला
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव जीएस बाठ ने कहा कि स्टाफ की कमी के चलते दसवीं की परीक्षाएं आगे बढ़ानी पड़ी हैं। पेपरों की जांच से लेकर फ्लाइंग स्क्वाएड में स्टाफ की ड्यूटी लगी है।
दोनों कक्षाओं की परीक्षा एक साथ होने पर बैंकों से पेपर लेने में अतिरिक्त अमला लगाना पड़ता। जो उपलब्ध नहीं था लेकिन रिजल्ट पर असर नहीं पड़ेगा।
हम सीबीएसई से 15 दिन आगे चल रहे हैं। पिछले साल की तुलना में 10-15 दिन पहले रिजल्ट आ जाएगा।