पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की विभिन्न कक्षाओं से पास विद्यार्थी अब अपने सर्टिफिकेट में गलतियां सुधार सकेंगे। इसके लिए बोर्ड ने विद्यार्थियों को आखिरी मौका दिया है, जिसमें वर्षों पुराने केसों का निपटारा किया जाएगा।
हर साल करीब सात लाख विद्यार्थी दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा देते हैं। इनके फॉर्म स्कूल स्तर पर भरे जाते हैं। वहां कई बार नाम, माता-पिता के नाम और जन्म तिथि की गलतियां हो जाती हैं। 90 प्रतिशत गलतियां स्कूल स्तर पर और दस प्रतिशत बोर्ड के स्तर पर भी हो जाती थीं।
बोर्ड ने पहले ऐसी गलतियों के सुधार के लिए दो साल का समय दिया था। फिर नियम बनाया गया कि नतीजा घोषित होने के पांच साल तक विद्यार्थी संशोधन करवा सकेंगे।
इसके बावजूद बड़ी संख्या में विद्यार्थी अभी भी रह गए हैं, जिनके सर्टिफिकेट में गलतियां हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे हैं, जिन्होंने विदेश जाते समय इस बात पर ध्यान दिया।
नियमानुसार बोर्ड ऐसे विद्यार्थियों केसर्टिफिकेट में संशोधन कर नहीं सकता। लिहाजा, बड़ी संख्या में लोग अदालत चले गए। लोगों पर तो बोझ पड़ ही रहा था, बोर्ड पर कोर्ट केस लड़ने को बोझ पड़ रहा था। पांच साल से पुराने 100-150 केस हर महीने बोर्ड आते हैं। इसे देखते हुए बोर्ड ने इस पर विचार शुरू किया।
स्पेशल चांस, विद्यार्थियों को देनी होगी मोटी फीस
जानकारी के मुताबिक 27 फरवरी 2015 को हुई बोर्ड मीटिंग में ऐसे विद्यार्थियों को स्पेशल चांस देने का फैसला किया गया है, लेकिन बोर्ड ने सिर्फ 45 दिनों की मोहलत दी है। इस दौरान ही विद्यार्थियों को गलतियों में सुधार करवाना होगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने सुधार के लिए कोर्ट केस कर रखे हैं, वे भी स्पेशल चांस में संशोधन करवा सकेंगे।
पीएसईबी ने विद्यार्थियों को स्पेशल चांस देकर राहत जरूर दी है। लेकिन पांच साल से पुराने सर्टिफिकेट में गलतियां सुधारने के नाम पर बोर्ड मोटी फीस भी वसूलेगा। इन विद्यार्थियों से पांच हजार रुपये प्रति संशोधन लिया जाएगा। साथ ही जिस साल का केस है, उससे अब तक पांच सौ रुपये प्रति वर्ष लेट फीस भी ली जाएगी। हालांकि, रुटीन में संशोधन की फीस सिर्फ एक हजार रुपये है।
जीएस बाठ, सचिव, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने बताया कि बहुत से विद्यार्थियों ने नियमानुसार पांच वर्षों में भी गलतियों में सुधार नहीं करवाया है। बहुत से पेरेंट्स अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। उन्हें राहत देने को 45 दिनों का स्पेशल चांस दिया गया है। इसके बाद पांच साल की शर्त ही लागू रहेगी। इसमें बोर्ड का खर्च भी होगा, इसलिए फीस ज्यादा रखी गई है।