विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने का गोरखधंधा चल रहा है। खुद यूजीसी में कुछ ऐसे भेदिए हैं जो नेट का फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर लोगों को बेच रहे हैं।
मेरठ यूनिवर्सिटी में नेट का सर्टिफिकेट लगाकर शिक्षक पद की नौकरी पाने वालों के जब सर्टिफिकेट जांचे गए तो इसका खुलासा हुआ। अब राजभवन ने इस मामले में सख्त रुख अख्तियार किया है।
कुलाधिपति बीएल जोशी की ओर से सभी राज्य विश्वविद्यालयों को पत्र भेजकर नेट की अर्हता पर शिक्षक बनने वालों के सर्टिफिकेट की जांच करवाने के आदेश दिए हैं। वहीं, पत्र आने के बाद एलयू में खलबली मची हुई है।
लखनऊ विश्वविद्यालय में कुल 370 में से 55 शिक्षक ऐसे होंगे, जिन्होंने नेट की अर्हता पर नौकरी हासिल की है। ऐसे में अब राजभवन की ओर से पत्र आने के बाद इनके सर्टिफिकेट का सत्यापन किया जाना है।
अभी तक फर्जी मार्कशीट बनाकर नौकरी हासिल करने के कई मामले खुद एलयू में प्रकाश में आए हैं।
इसमें समाजकार्य विभाग में एक शिक्षक द्वारा पीजी के अंक प्रतिशत बढ़ाकर बताने, सैन्य अध्ययन विभाग में एक शिक्षक द्वारा फर्जी अंक तालिका लगाकर नौकरी हासिल करने और पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में एक शिक्षक द्वारा फर्जी अंक तालिका लगाने का मामला पहले प्रकाश में आ चुका है।
अब नेट के सर्टिफिकेट की जांच के आदेश के बाद शिक्षकों में खलबली मची है। फिलहाल अब जांच के बाद ही सामने आएगा कि इसमें कितने सर्टिफिकेट सही हैं और कितने फर्जी।
यूनिवर्सिटी के साथ-साथ कॉलेजों में भी नेट की अर्हता पर शिक्षक बनने वालों के सर्टिफिकेट जांचे जाएंगे। लखनऊ विवि से संबद्ध कुल 133 डिग्री कॉलेजों में से 24 राजकीय व सरकारी सहायता प्राप्त हैं।
इनमें भी बड़ी संख्या में शिक्षक नेट की अर्हता पर भर्ती हुए हैं। ऐसे में अब इन शिक्षकों के भी सर्टिफिकेट की जांच की जाएगी।
इधर, इस मामले में जब लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसबी निमसे से बात की गई तो उन्होंने इस मसले पर ज्यादा कुछ बोलने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि राजभवन के निर्देश का पालन किया जाएगा।
पीएचडी की बजाए ‘नेट’ पास की अर्हता आसान
फिलहाल प्रदेश भर के 11 राज्य विश्वविद्यालय व करीब 439 डिग्री कॉलेज में नेट की अर्हता पर शिक्षक बनने वालों की संख्या काफी अधिक है।
दरअसल वर्ष 1989-90 के बाद से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) पास करने वालों को शिक्षक पद पर भर्ती की अर्हता मान लिया।
इसके बाद नेट पास करने वालों की बाढ़ सी आ गई। हालांकि नेट पास करना आसान नही है, लेकिन अगर इसके फर्जी सर्टिफिकेट बन रहे हैं तो यह काम पीएचडी करने की अर्हता से हासिल करने से आसान है, क्योंकि पीएचडी करने में कम से कम तीन से लेकर पांच वर्ष लग ही जाते हैं।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों में तो नेट पास को प्राथमिकता भी दी जा रही है। बाकी राज्य विश्वविद्यालय में नेट पास या फिर पीएचडी डिग्री में से कोई एक अर्हता होने पर अभ्यर्थी लेक्चरर पद के लिए आवेदन कर सकता है।
नेट की अर्हता पर शिक्षक की नौकरी हासिल कर वह बाद में जॉब के साथ-साथ पीएचडी भी पूरी कर लेता है। यही नहीं, नेट की अर्हता रखने पर यूनिवर्सिटी पीएचडी दाखिले में भी प्राथमिकता देती हैं।
मेरठ यूनिवर्सिटी में तो 108 फर्जी नेट सर्टिफिकेट मिले
मेरठ यूनिवर्सिटी में तो फर्जी नेट का सर्टिफिकेट हासिल करने वालों की बाढ़ सी आ गई। यहां पर नेट पास करने वालों की संख्या करीब 108 बताई जा रही है।
ऐसे में यूजीसी की नेट परीक्षा पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों की मानें तो नेट का फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के गोरखधंधे में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) में कार्यरत कुछ कर्मचारियों पर भी शक किया जा रहा है।