नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में 40 साल की अविवाहित महिलाओं पर देह व्यापारियों की सबसे ज्यादा नजर है। जहां बच्चियों और युवतियों को अब तक इस धंधे में घसीटा जा रहा था वहीं अब उम्रदराज महिलाओं को भी जबरन धकेला जा रहा है।
राष्ट्रीय महिला आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक छोटी बच्चियों के साथ-साथ अधिक उम्र की महिलाओं की खरीद-फरोख्त भी चरम पर है। गरीबी से त्रस्त अधिक उम्र की अविवाहित महिलाओं को नौकरी, मोटी पगार और सुख सपने दिखाकर उन्हें देह व्यापार की अंधेरी गलियों में धकेला जा रहा है।
खासतौर पर बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में गरीबी से त्रस्त परिवारों की लड़कियों पर इस धंधे को चलाने वालों की सर्वाधिक नजर है। ये मौका पाते ही महिलाओं को बरगलाने की कोशिश करते हैं और उन्हें अपने घर से दूर लाकर जबरन देह व्यापार में धकेल देते हैं।
आयोग के मुताबिक इन राज्यों के कई इलाकों में चार साल तक की छोटी उम्र की लड़कियों और 40 साल से अधिक उम्र की गरीब अविवाहित महिलाओं को भी देह व्यापार में बड़ी संख्या में धकेला जा रहा है। महज 20-25 हजार रुपये में इनकी नीलामी होती है। इस दलदल में फंसने वाली ज्यादातर महिलाएं गरीब और अनुसूचित जाति, जनजाति व आदिवासी हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य में ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली महिलाओं के बयान को पुलिस गंभीरता से नहीं ले रही है। आयोग ने केंद्र सरकार से मांग की है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए इमॉरल ट्रैफिकिंग प्रिवेंशन एक्ट 1956 को और भी सख्त बनाया जाए।
इसके अलावा सुदूर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में महिलाओं को जागरूक बनाने के लिए कार्यक्रम चलाए जाएं। आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा का कहना है कि नेपाल और बांग्लादेश सीमा पर महिलाओं की तस्करी खूब हो रही है। इसलिए मानव तस्करी की घटनाओं पर लगाम कसने के लिए विशेष कानून बनाने की जरूरत पर आयोग ने बल दिया है।