बोर्ड परीक्षाओं के सीजन में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की हेल्पलाइन पर अब तनाव (टेंशन) से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं।
बच्चे यह भी पूछ रहे हैं कि उनके माता-पिता उन्हें हमेशा तनाव न लेने को बोलते हैं, वह कैसे इस तनाव से बचें और यह तनाव होता कैसे है। तनाव से जुड़े ऐसे ही सवालों के जवाब सीबीएसई की काउंसलर डॉ. सोना कौशल गुप्ता ने दिए। डॉ. गुप्ता का कहना है कि तनाव दो तरह का होता है।
पहला तो हल्का तनाव होता है जो कि एक परीक्षा देने जा रहे छात्र के लिए फायदेमंद है। हल्के तनाव से उसे प्रोत्साहन मिलता रहता है, आत्मविश्वास भी बढ़ता रहता है और परिणाम भी अच्छे होते हैं। उन्होंने बताया कि जब यह हल्का तनाव भविष्य, परिणाम और कोर्स की चिंता, अभिभावकों के ताने मारने या सहयोग न करने की वजह से बढ़ने लगता है तो इससे खतरा पैदा हो जाता है।
तब महसूस होता है कि दिल जोर से धड़क रहा है, भूख प्यास नहीं लगती, पढ़ाई में मन नहीं लगता। उन्होंने सलाह दी कि बच्चे को हल्के तनाव से भारी तनाव की ओर कतई न जाने दें। बच्चों में परीक्षा के डर पर उन्होंने बताया कि हमेशा उन्हें अपना लक्ष्य निर्धारित रखना चाहिए।
मसलन, आज का लक्ष्य, इस सप्ताह का लक्ष्य और जिंदगी का लक्ष्य। जब भी डर लगे, आत्मविश्वास कम लगे और तनाव महसूस होने लगे तो अपने भविष्य के बारे में सकारात्मक सोचें। इससे नई ऊर्जा मिलेगी और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।